सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 9 अक्तूबर तय की है। केंद्र सरकार ने इस नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नियुक्ति नियमावली की कानूनी वैधता पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर केंद्र का ऐतराज
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक पद पर चयन के लिए तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के लिए निर्धारित तीन नामों के पैनल के नियम की अनदेखी की गई है। इस कारण राज्य में पुलिस महानिदेशक की यह नियुक्ति पूरी तरह अवैध है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से इस मामले की सुनवाई बुधवार को ही करने का अनुरोध किया था। हालांकि, राज्य सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तत्काल सुनवाई पर असमर्थता जताई। मामले में अदालत की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने भी अगले सप्ताह अपनी अनुपलब्धता व्यक्त की।
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राज्य सरकार दाखिल करेगी अपना जवाब
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 9 अक्तूबर को तय की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश वी. मोहना और न्यायाधीश जॉयमाला बागची की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने राज्य सरकार को आगामी सुनवाई में नियुक्ति नियमावली की वैधानिकता पर अपना जवाब देने का आदेश दिया है। राज्य सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार अगली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति की वैधता पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर देगी। हालिया सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि तदाशा मिश्रा को डीजीपी पद का अवसर देने के लिए नियुक्ति नियमावली के नियम-5 में संशोधन किया गया था।