झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच संभावित दरार के संकेत के बीच कांग्रेस ने राज्य के नेताओं के साथ नई दिल्ली में मंगलवार को एक बैठक की। झारखंड कांग्रेस प्रमुख राजेश ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली मुख्यालय में बुलाई गई बैठक में हिस्सा लिया और अन्य मुद्दों के साथ सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम (सीएमपी) पर चर्चा की।
झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों- झामुमो और कांग्रेस के बीच दरार की अटकलों के बीच नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के चार मंत्री समेत लगभग 30 नेता शामिल हुए।
ठाकुर ने बैठक के बाद दिल्ली से फोन पर पीटीआई को बताया कि "हमने आज दिल्ली में एक सफल बैठक की, जिसे हमारे झारखंड प्रभारी अविनाश पांडे ने बुलाया था। इस बैठक में सीएमपी सहित सभी मुद्दों पर चर्चा की गई। सीएमपी से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श किया गया।"
उन्होंने राज्य में मौजूदा झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार के लिए किसी भी तरह के खतरे से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी गठबंधन में मतभेद पैदा होते हैं लेकिन उसे आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाता है। हालांकि कांग्रेस के सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब एक महीने पहले भेजे गए सीएमपी को लेकर पार्टी के प्रस्ताव पर सोरेन से प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर नेताओं ने बैठक में असंतोष जताया। सीएमपी को 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए तैयार किया गया है।
बैठक में भाग लेने वाले कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने राज्य में अपने विधायकों के साथ हुए व्यवहार से दुखी होकर विधायकों से कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री से दूरी बनाए रखने को कहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि अपने गठबंधन सहयोगी के नेताओं के प्रति झामुमो के रवैये से न केवल संबंधों में तनाव होगा बल्कि यह उसके लिए ऐसे समय में परेशानी का सबब बन सकता है जब वह पहले से ही पार्टी के अंदर परेशानी का सामना कर रही है।
झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार पर पिछले हफ्ते ही पार्टी की विधायक सीता सोरेन ने आरोप लगाया था कि झारखंड में जल, जंगल और भूमि संसाधन अधिकारियों के एक वर्ग द्वारा "भ्रष्ट प्रथाओं" के कारण खराब हो रहे हैं। सीता सोरेन ने राज्यपाल रमेश बैस से राज्य की प्राकृतिक संपत्ति की रक्षा के लिए आग्रह किया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मार्च में आरोप लगाया था कि भाजपा उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है और सोशल मीडिया और समाचार चैनलों का उपयोग "झूठ फैलाने" के लिए कर रही है। उन्होंने विधानसभा में भगवा पार्टी पर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रचने और खदानों की लूट का 'झूठा प्रचार' करने का आरोप लगाया था। बता दें कि सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन के पास 81 सदस्यीय सदन में 47 विधायक हैं। जिसमें झामुमो के 30, कांग्रेस के 16 और राजद के एक विधायक शामिल हैं।