झारखंड सरकार ने सिंदरी में हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) से 500 मीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने उर्वरक संयंत्र के मुख्य द्वार पर सोमवार से दो दिवसीय धरने का आह्वान किया है। बीएमएस स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है। हालांकि, बीएमए आंदोलनकारी संयत्र के पास नहीं दिखाई दिए हैं।
धनबाद के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) प्रेम कुमार तिवारी ने अधिसूचना में कहा कि शांति, कानून-व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के कामकाज को बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई है, जिसमें चार से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई गई है। एसडीएम ने कहा, एचयूआरएल सिंदरी परियोजना के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के आवेदन पर कार्रवाई शुरू की गई है, जो आशंकित थे कि प्रस्तावित दो दिवसीय आंदोलन से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
एफसीआई सिंदरी के स्थान पर आई एचयूआरएल सिंदरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। प्रधानमंत्री ने 25 मई, 2018 को बरौनी (बिहार) और गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) संयंत्रों के साथ ही इसकी भी आधारशिला रखी थी। सिंदरी संयंत्र प्रति दिन 3,850 टन यूरिया और 2,250 मीट्रिक टन अमोनिया का उत्पादन करता है। हालांकि, संयंत्र ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है, लेकिन इसका औपचारिक उद्घाटन अभी तक नहीं हुआ है।
इसी मुद्दे पर 15 नवंबर, 2022 को संयंत्र के मुख्य द्वार पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समर्थित यूनियन ने प्रदर्शन किया था, जिससे एक सप्ताह तक संयंत्र का संचालन रुक गया और उत्पादन बंद हो गया था। रविवार को बाघमारा के भाजपा विधायक ढुलू महतो ने भी स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के मुद्दे पर एक संयंत्र स्थल पर प्रदर्शन भी किया था।
एचयूआरएल सिंदरी प्लांट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपेन रे ने मीडियाकर्मियों को बताया कि संयंत्र ने अब तक 80 फीसदी नौकरियां स्थानीय युवाओं को दी हैं। उन्होंने कहा, अगर किसी संगठन या व्यक्ति को स्थानीय युवाओं के रोजगार के बारे में कोई संदेह है, तो वे उचित माध्यम से जांच कर सकते हैं।