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कब तक चार मंत्रियों के साथ चलेगी झारखंड सरकार?

Mon, 16 Feb 2015 04:27 PM IST
नीरज सिन्हा / रांची बीबीसी संवाददाता
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झारखंड में बहुमत का पर्याप्त आंकड़ा होने के बाद भी पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन अभी बाकी है। अटकलों के बीच तारीखें गुजरती जा रही हैं। मंत्रिमंडल का पूर्ण गठन ना होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। उसने राज्यपाल से मिलकर इस मामले में पहले ही हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है।
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सत्तापक्ष-विपक्ष दोनों को इंतज़ार है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा? मंत्रिमंडल विस्तार के बीच राजनीतिक उलटफेर के कारण झारखंड विकास मोर्चा के छह विधायक भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं।

संख्या बल और सरकार की स्थिति

पिछले साल 28 दिसंबर को मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत चार मंत्रियों ने पद की शपथ ली थी। 81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 41 विधायक जरूरी हैं। सत्तारूढ़ दल के पास यह संख्या 42 है। इनमें भाजपा के 37 और आजसू के पांच विधायक शामिल हैं। भाजपा ने चुनाव पूर्व आजसू से गठबंधन किया था।

झारखंड राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बन सकते हैं, लेकिन अभी तक आठ मंत्रियों के नाम तय नहीं हैं।पहले से ही इसमें मुश्किलों का सामना कर रही भाजपा अब दलबदलुओं में किसे मंत्री बनाती है, नजरें इस पर हैं। विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता विनोद पांडे को कहते हैं, "सत्तारूढ़ दल के पास जो आंकड़ा है, वह तलवार की धार जैसी है।" "भाजपा को अपने सहयोगी दल आजसू पर भरोसा नहीं था।

इसलिए सरकार गठन के साथ ही भाजपा दूसरे दलों के विधायकों को तोड़ने की कथित साज‌िश में जुटी रही।" झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव का दावा है कि भाजपा ने विपक्ष के विधायकों को तोड़ने की कोशिशों के बीच मंत्रिमंडल के विस्तार को लटकाए रखा। सत्ता पक्ष की नज़र आंकड़े के लिहाज से विपक्ष को कमजोर करने पर है।
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जेवीएम की सदस्यता खत्म करने की मांग

वहीं भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों को सत्ता पक्ष में बैठने की अनुमति दे दी गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा कहते हैं कि सत्ता की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री अति व्यस्त रहे। अब जल्द ही विस्तार हो जाएगा। रही बात दूसरे दल के विधायकों के भाजपा में शामिल होने की, तो वे राज्य के विकास और स्थायित्व के लिए सरकार के साथ जुड़ रहे हैं।

इधर पार्टी के छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद जेवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष से दल बदल कानून के तहत भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों की सदस्यता भी समाप्त करने की मांग की है।

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