झारखंड के मोस्ट वांटेड नक्सली और प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के फरार स्वयंभू सुप्रीमो को दिनेश गोप उर्फ कुलदीप यादव उर्फ बड़कू को एनआईए ने गिरफ्तार किया। एनआईए के मुताबिक, उसे नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ 102 आपराधिक मामले दर्ज थे। इतना ही नहीं मोस्ट वांटेड नक्सली पर 30 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था। वह झारखंड के खूंटी जिले का निवासी था।
इस मामले को लेकर एनआईए पड़ी थी पीछे
एनआईए ने बताया कि मोस्टवांटेड नक्सली गोप अपने सहयोगियों के साथ एक पेट्रोल पंप पर एक बैंक खाते में नोटबंदी के बाद अवैध हो चुके नोटों को जमा करने में शामिल था। इन नोट को लेवी और जबरन वसूली के माध्यम से एकत्र किया जाता था। इस अवैध धन को बैंकिंग चैनलों और संदिग्ध शेल कंपनियों के माध्यम से करीबी सहयोगियों के नाम पर निवेश किया गया था। इसमें गोप और उसके परिवार के साथ ही सहयोगियों को आरोपी बनाया गया था।
शुरूआत में यह मामला 10 नवंबर, 2016 को रांची के बेरो पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में जब एनआईए ने इसकी जांच अपने हाथ में ली तब 19 जनवरी, 2018 को केंद्रीय जांच एजेंसी ने फिर से मामला दर्ज किया। पुलिस ने इस मामले में नौ जनवरी, 2017 को चार लोगों के खिलाफ पहली चार्जशीट दायर की थी।
एनआईए ने मामले में गोप समेत 11 आरोपियों के खिलाफ पहला पूरक आरोप पत्र दायर किया था। इसके बाद एनआईए ने पिछले साल 23 जुलाई को मामले में पांच व्यक्तियों और तीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के खिलाफ दूसरा पूरक आरोप पत्र दायर किया था। एनआईए ने इस मामले में 14 बैंक खातों और दो कारों के साथ-साथ एक करोड़ से अधिक की नकदी और अचल संपत्ति भी कुर्क की थी।
कई राज्यों में दर्ज हैं मामले
एनआईए की जांच के अनुसार, गोप के खिलाफ झारखंड, बिहार और ओडिशा में 102 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश मामले हत्या, अपहरण, धमकी, जबरन वसूली और 2007 में गठित एक माओवादी संगठन पीएलएफआई के लिए धन जुटाने से संबंधित हैं। वह कारोबारियों, ठेकेदारों और जनता को आतंकित करने के लिए अपनी पीएलएफआई टीम के सदस्यों के जरिए पैसे वसूलता और हमलों को अंजाम देता था।
झारखंड पुलिस ने 25 तो एनआईए ने घोषित किया था पांच लाख का इनाम
एनआईए ने झारखंड सरकार द्वारा घोषित 25 लाख रुपये के इनाम के अलावा, गोप का पता लगाने के लिए 5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। एनआईए ने बताया कि गोप लगभग दो दशकों से फरार था। बीते साल 3 फरवरी को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदरी पुलिस थाने के वन क्षेत्र में गोप के नेतृत्व वाले पीएलएफआई दस्ते और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। हालांकि वह तब भागने में कामयाब रहा था।
कई आतंकी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है PLFI
पहले झारखंड लिबरेशन टाइगर्स (JLT) के रूप में जाना जाने वाला PLFI झारखंड में सैकड़ों आतंकी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। यह संगठन बेरोजगार युवाओं को मोटरबाइक, मोबाइल फोन और आसानी से पैसे देकर लुभाता था और प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए घातक हथियारों से लैस करता था। एनआईए ने इसके बारे में भी खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने बताया कि जबरन वसूली पीएलएफआई की आय का प्रमुख स्रोत है ।