झारखंड सरकार ने गुरुवार को नियमों में ऐसे संशोधन का संकेत दिया जिसके अनुसार अगर कोई कंपनी किसी जमीन का अधिग्रहण करती है और पांच साल तक उसका इस्तेमाल नहीं करती है तो केंद्रीय कानून की तरह यह जमीन उसके मूल मालिक को वापस कर दी जाएगी।
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झारखंड भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनःस्थापन नियम-2015 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार के एक प्रावधान में कहा गया था कि यदि कोई कंपनी अधिग्रहित भूमि का पांच साल तक उपयोग नहीं करती है तो जमीन मूल मालिक को वापस कर दी जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा में आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने इस प्रावधान को हटा दिया था। 2019 विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में शामिल हुए विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र के नियम में ऐसा प्रावधान है लेकिन राज्य के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
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प्रदीव यादव ने आगे कहा कि मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस प्रावधान को राज्य के कानूनों में भी शामिल किया जाना चाहिए। इसका जवाब देते हुए राज्य सरकार में मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने जो भी गलत कदम उठाए गए हैं उनको दुरुस्त किया जाएगा।