पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। राज्य में विकास कार्य ठप हैं, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का गरीबों और आदिवासियों से कोई नाता नहीं रह गया है। सरकार का पूरा ध्यान केवल रुपये कमाने में लगा हुआ है।
झारखंड में सियासी बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। शनिवार को राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार का आदिवासियों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है और वह केवल पैसा बनाने के इरादे से काम कर रही है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने ये आरोप गिरिडीह जिले के तिसरी ब्लॉक में एक रैली के दौरान लगाए। इस दौरान उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए।
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रैली का नेतृत्व करते हुए राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। राज्य में विकास कार्य ठप हैं, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का गरीबों और आदिवासियों से कोई नाता नहीं रह गया है। सरकार का पूरा ध्यान केवल रुपये कमाने में लगा हुआ है।
पूर्व सीएम मरांडी ने आरोप लगाया कि सोरेन सरकार में हत्या, बलात्कार और लूट के मामले कई गुना बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के लोग रेत की कमी का सामना कर रहे हैं लेकिन सरकार पिछले तीन साल में एक भी रेत घाट की नीलामी नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि मैंने सरकार से कहा था कि अगर वह नीलामी नहीं कर सकती है तो वह राज्य के लोगों के लिए बालू घाटों को मुफ्त कर दें। लेकिन, वह ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने तस्करी कर रेत ले जाने वाले ट्रैक्टरों से पैसा बनाने के लिए पुलिस को लगाया है।
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पूर्व सीएम का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले यानी 11 नवंबर को सोरेन सरकार ने राज्य विधानसभा में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने के लिए और 1932 भूमि रिकॉर्ड से संबंधित विधेयक को पारित किया है। सरकार इस विधेयक के जरिए आदिवासियों के बीच अपने समर्थन आधार को मजबूत करने के प्रयास में है।