शहीद सीताराम के बड़े भाई सोनू उपाध्याय का कहना है कि उन्हें बीएसएफ और सरकार की तरफ अभी तक कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके शहीद भाई के कपड़े, वर्दी और मोबाइल फोन भी नहीं मिले हैं।
उन्होंने कहा कि एक बीएसएफ का अधिकारी उनके घर आये थे और उन्हें एक फोन नंबर देकर चले गए। करीब 5 दिन पहले उन्होंने उस नंबर पर फोन किया था। उन्हें फोन पर बताया गया कि सीताराम के कपड़े, वर्दी, यूनिफॉर्म और बाकी चीजें 8-10 दिनों के भीतर उनके घर पहुंचा दी जाएंगी। इसके बाद बीएसएफ अफसर ने कहा कि नौकरी के मामले में बीएसएफ के कमांडिंग अफसर गिरिडीह के डीसी से बातचीत करेंगे।
प्रमाणपत्र दिखाना आवश्यक
डीसी मनोज कुमार का कहना है कि नियमों के मुताबिक रश्मि को बीएसएफ का प्रमाण पत्र दिखाना होगा जिसमें यह लिखा हो कि उसके पति की मौत ड्यूटी के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि सीताराम के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है लेकिन उनकी पत्नी का दावा है कि सरकार द्वारा उन्हें 10 लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी।
उन्होंने कहा कि सहायता राशि के लिए एक समाचारपत्र की कटिंग के साथ आवेदन सरकार को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा सभी प्रासंगिक दस्तावेज और प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही वह उन्हें तीन या चार श्रेणी के कर्मचारी की नौकरी दे सकते हैं।