वह खुद को झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) का सदस्य बता रहे थे। यह नक्सलियों का गुट है। वह जितेंद्र के दरवाजे पर खड़े होकर दरवाजा खोलने के लिए कह रहे थे। जब उसके परिवार ने ऐसा करने से मना कर दिया तो ये उन्हें गोली मारने की धमकी देने लगे। इसके बाद कहने लगे कि वह पप्पु लोहरा के आदमी हैं जो कि जेजेएमपी का बॉस है।
मामले पर जितेंद्र की पत्नी सिंधु देवी का कहना है कि 'मौत के डर से हमने दरवाजा खोल दिया क्योंकि वह खुद को जेजेएमपी का सदस्य बता रहे थे, इसके बाद मेरे पति सामने आ गए और उन सभी नक्सलियों ने उन्हें डंडों से पीटना शुरू कर दिया। जब मेरे पति के भाई भिरेंद्र सिंह उन्हें बचाने आए तो वह उन्हें भी पीटने लगे।'
देवी ने आगे कहा कि वह और उसका परिवार भाग्यशाली था कि उनके रोने की आवाज सुनकर वहां गांव वाले आ गए। उन्होंने समर्थन किया नहीं तो दोनों भाई मारे जाते। जितेंद्र और उसके भाई भिरेंद्र दोनों को बहुत सी चोटें आई हैं। उन्हें इलाज के लिए पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। बता दें जेजेएमपी भगोड़े नक्सलियों का एक समूह है जिन्होंने लातेहार जिले के पुलिस स्टेशन पर अपना प्रभाव जमाया हुआ है। शुक्रवार की सुबह गांव वाले मनिका पहुंचे और घटना के बारे में पुलिस को सूचित किया।