भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने ट्वीट में पूजा सिंघल के व्हाट्सएप चैट का भी उल्लेख करते झारखंड की राजनीति में सरगर्मी पैदा कर दी है। उन्होंने लिखा कि 'झारखंड तो चन्द्रकांता उपन्यास हो गया है,इस सीनाज़ोरी ने तो कमाल कर दिया।
झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सीएम हेमंत सोरेन और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में घिरीं आइएएस पूजा सिंघल पर तगड़ा तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट करके हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना साधा है। भाजपा सांसद ने अपने ट्वीट में पूजा सिंघल के व्हाट्सएप चैट का भी उल्लेख करते झारखंड की राजनीति में सरगर्मी पैदा कर दी है।
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उन्होंने लिखा कि 'झारखंड तो चन्द्रकांता उपन्यास हो गया है,इस सीनाज़ोरी ने तो कमाल कर दिया,WhatsApp चैट ने तो यह बता दिया कि राजा कौन! कितने पैसे राजा को प्रत्येक महीने?पकड़े गए पैसे में राजा का कितना,बाकी तो संथाल के खनन पदाधिकारी बता ही देंगे? इंतज़ार समाप्ति की तरफ़।'
भाजपा सांसद ने किया ट्वीट
इसके बाद उन्होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा कि सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास को मुख्यमंत्री ज़बरदस्ती गिरफ़्तार करवाना चाहते हैं। उनकी बात झारखंड के पुलिस महानिरीक्षक नीरज सिन्हा जी और पंकज कम्बोज ने मानने से इंकार कर दिया, इस कारण विजिलेंस व भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से इनका तबादला कर दिया गया।
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इससे पहले अपने ट्वीट में उन्होंने कल लिखा था कि ईडी ने अपने रिमांड में सुमन कुमार के बयान के अनुसार यह तो कहा कि कुछ पैसे पूजा सिंघल के हैं, बॉंकी पैसे राजा के तो नहीं जो ज़िला खनन पदाधिकारीयों ने भेजा ? प्रेम भइया लंदन भागने की फ़िराक़ में और चौबे भैया दिल्ली में मैनेज करना है। उन्होंने ये नहीं बताया है कि प्रेम भइया, राजा और चौबे कौन हैं, लेकिन उनके इस ट्वीट के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे है।
ईडी कर रही नए खुलासे
वहीं, पूजा सिंघल मामले में ईडी नित नए खुलासे कर रही है। ईडी मनरेगा से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामले में जांच के लिए पूजा सिंघल के पति के मल्टी स्पेशलिटी पल्स अस्पताल पहुंची थी। यहां जांच के दौरान ईडी ने कई दस्तावेज भी जब्त किए थे। इनके आधार पर ईडी ने कई खुलासे किए है। ईडी के मुताबिक,पूजा सिंघल के सारे काले धन को पल्स हॉस्पिटल को तैयार करने में खपाया गया है। अस्पताल के लिए जमीन खरीदने से लेकर बिल्डिंग बनाने और मशीन की खरीदारी तक में 80-90 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इनमें ज्यादातर लेन-देन कैश में हुए हैं।