झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दे दी है। झारखंड हाईकोर्ट ने फर्जी डिग्री विवाद को लेकर उनके खिलाफ दायर एफआईआर निरस्त करने का आदेश दिया है। निचली अदालत में चल रहे केस को भी समाप्त करने का फैसला दिया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी कहा कि एमबीए के फर्जी डिग्री विवाद में दर्ज प्राथमिकी और निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को निरस्त किया जाता है। फैसले में कहा गया है कि दुबे के खिलाफ राजनीतिक विद्वेष के चलते एफआईआर दर्ज कराई गई। इसलिए उसे निरस्त करने के साथ ही केस खत्म किया जाता है।
सांसद दुबे ने प्राथमिकी और निचली अदालत द्वारा मामले में लिए गए संज्ञान को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दुबे के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं वे सब निराधार हैं। राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित होकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। निर्वाचन आयोग से भी शिकायत की गई थी, लेकिन आयोग ने शिकायत पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके पूर्व झारखंड सरकार ने कहा कि एमबीए की डिग्री फर्जी होने का हवाला देकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दुबे ने वर्ष 2009 और 2014 के चुनाव में एमबीए की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त करने की जानकारी दी है। झूठी डिग्री का हवाला देकर उन्होंने लोगों में भ्रम फैलाया है। पुलिस ने जांच पूरी करते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस पर निचली अदालत की ओर से संज्ञान भी सही धाराओं में लिया गया है। वहीं, निर्वाचन आयोग ने बिना जांच किए ही शिकायत को खारिज कर दिया है। इसे दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।