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जम्मू-कश्मीर: 73 दिनों के रिकॉर्ड समय में यातायात के लिए बहाल होगा जोजिला पास

Fri, 18 Mar 2022 08:18 AM IST
सुशील कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

सर्दियों की शुरुआत में बर्फबारी के बाद अक्सर यह पास नवंबर के दूसरे सप्ताह में बंद हो जाता है और इसके अप्रैल के आखिरी सप्ताह में खोला जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कश्मीर को लद्दाख के साथ जोड़ने वाले जोजिला पास को बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (आईआरओ) इस वर्ष 73 दिनों के रिकॉर्ड समय के बीच खोलने जा रही है। 19 मार्च को श्रीनगर-लेह राजमार्ग को यातायात के लिए बहाल कर दिया जाएगा। आम तौर पर करीब 150 दिन तक बंद रहने वाले इस मार्ग को बीते वर्ष बीआरओ ने कड़ी मशक्कत के बाद 110 दिन के भीतर ही खोल दिया था।

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11,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोजिला, श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग मर एक स्ट्रेटेजिक पास है और लद्दाख संभाग में तैनात भारतीय सेना और अन्य सुरक्षाबलों के ऑपरेशनल तैयारियों के लिए लाइफलाइन माना जाता है। सर्दियों की शुरुआत में बर्फबारी के बाद अक्सर यह पास नवंबर के दूसरे सप्ताह में बंद हो जाता है और इसके अप्रैल के आखिरी सप्ताह में खोला जाता है। बीआरओ के प्रोजेक्ट बीकन के एक अधिकारी ने बताया कि जोजिला पास, सोनमर्ग, गांदरबल से श्रीनगर की ओर 108 किलोमीटर की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट बीकन के पास है, जबकि जोजिला के उस पार गुमरि से आगे लेह की ओर बीआरओ का प्रोजेक्ट विजयक सभी जिम्मेदारियां निभाता है।

अधिकारी ने बताया कि इस बार भारी बर्फबारी के चलते छह जनवरी से जोजिला पास को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था और मौसम साफ रहने के चलते तीन फरवरी से यहां बर्फ हटाने का काम शुरू कर दिया गया था, जो लगभग पूरा हो चुका है। जोजिला पास पर करीब 15 फुट से अधिक बर्फ जमा थी, लेकिन कई जगहों पर हिमस्खलन के चलते अभी भी 30 फुट से अधिक बर्फ है, जिसे काटकर रास्ता निकाला गया है। जोजिला पास के ओआईसी कप्तान विपुल और आईसी (जेई) अमनदीप सिंह व उनकी 90 सदस्य टीम के कड़े प्रयासों से 19 मार्च को इस पास को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस वर्ष जोजिला पास का उद्घाटन करने के लिए केंद्रीय रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार पहुंच रहे हैं। इसके अलावा डीजी बीआरओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी, चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट बीकन ब्रिगेडियर आईके जग्गी के साथ अन्य सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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बता दें कि पिछले साल इस राजमार्ग को भारत और चीन के बीच पैदा हुए गतिरोध के बाद इसे ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रखने के निर्देश दिए गए थे। इस बीच प्रोजेक्ट बीकन और जोजिला के उस पार कारगिल वाले छोर से प्रोजेक्ट विजयक के अधिकारियों व जवानों ने इसे 31 दिसंबर, 2020 तक खुला रखा और इसे ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ का नाम दिया गया था। लेकिन खराब मौसम और भारी बर्फबारी के चलते इस पास पर जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते क्लीयरेंस ऑपरेशन को स्थगित कर दिया गया था।

बता दें कि प्रोजेक्ट बीकन और प्रोजेक्ट विजयक के अधिकारियों व जवानों की मेहनत की सरहाना करते हुए लद्दाख के लोगों ने इस बार रिकॉर्ड समय पर इसे खोलने के लिए बीआरओ का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इससे लद्दाख के लोगों को काफी राहत मिलेगी जो इस मार्ग के बंद होने पर हवाई मार्ग पर निर्भर होते हैं। साथ ही सेना की कानबाई की मूवमेंट भी अब आसानी से हो पाएगी। बता दें कि विपरीत परिस्थितियों में हमेशा बीआरओ ने अपना लोहा मनवाया है और इस चुनौती को पूरा कर उन्होंने अपने मोटो को साबित किया है ‘वी विल ईदर फाइंड ए वे, ऑर मेक वन’।

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