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पुलिस हिरासत में युवा शिक्षक की मौत, भड़की हिंसा

Wed, 20 Mar 2019 12:03 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
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घटना की जानकारी के बाद श्रीनगर व पुलवामा में सड़कों पर उतरी भीड़
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पुलवामा के अवंतीपोरा के एक कथित आरोपी शिक्षक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस उसे पूछताछ के लिए कुछ दिन पहले घर से उठाकर लाई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद श्रीनगर के पुराने शहर और पुलवामा में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए। उन पर काबू पाने के लिए पुलिस व सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और हवा में गोलियां चलाईं। घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, शाह फैसल व अल्ताफ हुसैन समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने घटना की निंदा करने के साथ निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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रिजवान असद पंडित (28) को सुरक्षा एजेंसियों ने उसके घर से उठाया था, जिसके बाद से वह श्रीनगर में स्थित जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के मुख्यालय में था। सोमवार की रात को उसकी मौत हो गई। मृतक के भाई जुलकर नैन पंडित ने बताया कि रिजवान पर इससे पहले भी पीएसए लगाया गया था। तब कोर्ट ने हटा दिया था। उसने अपनी सामान्य जिंदगी शुरू कर दी थी। भाई ने बताया क रिजवान एक शिक्षक था और दो विभिन्न जगह पर छात्रों को पढ़ाता था। वह जमात-ए-इस्लामी से भी जुड़ा हुआ था, क्योंकि उनके पिता भी इससे जुड़े हैं। 

सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर हमले के बाद हुई थी रिजवान की गिरफ्तारी
पुलवामा का कथित शिक्षक रिजवान असद पंडित 31 दिसंबर 2017 को लेथपोरा में सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर हुए फिदायीन हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया था। इस हमले को जैश के दो स्थानीय फिदायीन आतंकियों ने अंजाम दिया था। हमले में पांच सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे।
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इस हमले के बाद रिजवान को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उसे समय-समय पर पूछताछ के लिए बुलाया जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि रिजवान जैश के लिए ओजीडब्ल्यू का काम करता था।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एमएससी पास रिजवान एक स्कूल का प्रिंसिपल था और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नालाजी में पूर्व गेस्ट लेक्चरर था। 

एजेंसियों का कहना है कि उसका नाम 14 फरवरी को हुए पुलवामा अटैक के बाद एनआईए के संदिग्धों की सूची में था। इसबीच यह भी पता चला है कि सोमवार (18 मार्च ) को उसका 29वां जन्मदिन था।

भाई को पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं

आरोपी शिक्षक  रिजवान असद पंडित की पुलिस हिरासत में मौत के बाद परिवार के लोगों ने पुलिस पर सवाल खड़े किए। रिजवान के भाई जुलकर नैन ने किसी भी जांच से असहमति जताते हुए कहा कि यहां कोई जांच कभी पूरी नहीं हुई। उसके भाई को बिना किसी कसूर के मारा गया है। यह एक ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ है।

नैन के अनुसार, पुलिस ने रिजवान को कुछ दिन पहले घर से उठाया। इसके बाद उनसे कहा गया कि वह श्रीनगर एसओजी की हिरासत में है और इसमें पुलवामा पुलिस उनकी कोई सहायता नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि मंगलवार जब उनके पास यह खबर पहुंची तो उनको यकीन नहीं हुआ। रिजवान की मौत की खबर के बाद रिजवान के घर पर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया।

पुलिस ने भी शुरू की जांच
इस घटना के सामने आते ही शुरू में पुलिस ने काफी देर तक चुप्पी साधे रखी, लेकिन बाद में पुलिस ने घटना पर कहा कि एक आतंकी घटना के संबंध में तफ्तीश के लिए रिजवान पंडित को हिरासत में लिया गया था। प्रवक्ता के अनुसार उसकी हिरासत में मौत हुई है। इस संबंध में सीआरपीसी की धारा 176 के तहत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि घटना को लेकर एक अन्य जांच भी शुरू की जा चुकी है।
एनआईए ने कहा, हमने किसी पूछताछ को नहीं बुलाया

हमने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया था: एनआईए
 वहीं शुरू में मामले के साथ एनआईए (नेशनल इन्वेस्टीगेटिव एजेंसी) को जोड़े जाने को लेकर एनआईए ने भी अपना पक्ष रखा। एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने बताया कि एनआईए द्वारा न तो रिजवान को किसी पूछताछ के लिए बुलाया गया था और न ही एनआईए द्वारा जारी किसी जांच में उससे किसी अन्य जगह पर पूछताछ की गई है।
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पुलवामा और श्रीनगर में भड़की हिंसा

इस घटना की खबर फैलने के बाद से ही दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में प्रदर्शनों शुरू हो गया। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने जमकर पत्थरबाजी की और उन्हें खदेड़ने के लिए सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत भी करनी पड़ी। कई जगहों पर तो प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और हवाई फायरिंग भी की गई।

सूत्रों के अनुसार, जिले में मस्जिदों के लाउडस्पीकर से दुकानें बंद करने की अपील की गई। श्रीनगर के पुराने शहर के कई इलाकों और माईसुमा में भी दुकानें बंद हो गई और तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। हालात की गंभीरता को देखते पुलवामा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई और रेल सेवा भी स्थगित कर दी गई।

जेआरएल ने आज बुलाया बंद
इस बीच अलगाववादियों की ज्वाइंट रेसिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) द्वारा प्रदर्शन का कैलेंडर जारी कर बुधवार को लोगों से बंद का समर्थन करने को कहा गया है। वीरवार को सभी व्यापारी संगठनों, बार एसोसिएशन आदि को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने को कहा है और शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद भी प्रदर्शन का आह्वान किया गया है।
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