बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते लाइफ स्टाइल में युवा वर्ग सहनशक्ति खो रहा है। बेरोजगारी, पढ़ाई का बोझ, मां-बाप का दबाव और भविष्य की चिंता युवाओं के गले का फंदा बनने के तमाम कारण बन रहे हैं।
शायद यही वजह है कि युवाओं के फंदा लगाकर जान देने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस दिनों के भीतर ही शहर में आधा दर्जन युवाओं ने फंदा लगाकर जान दे दी। इसमें छात्र भी शामिल हैं। डाक्टरों की मानें तो इन घटनाओं पर अभिभावक ही अंकुश लगा सकते हैं।
पिछले दस दिन के भीतर कई मामले फंदा लगाकर जान देने के सामने आ चुके हैं। 23 नवंबर को दो छात्राओं ने फंदा लगा लिया। झिड़ी में छात्रा ने फंदा लगाया और इसी दिन शक्ति नगर इलाके में ग्यारहवीं कक्षा के छात्र ने फंदा लगाकर जान दी।
21 नवंबर को शहर के गांधी नगर में वेटरनरी की पढ़ाई कर चुकी डाक्टर ने फंदा लगा लिया। कुछ दिन पहले नानक नगर इलाके में सुनार की दुकान पर काम करने वाले युवक ने फंदा लगा लिया। सतवारी और आरएस पुरा क्षेत्र में भी दो युवाओं ने फंदा लगाकर जान दी।