प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना होगा। लिंग भेद, दहेज प्रथा, महिला हिंसा, नशाखोरी, भ्रूण हत्या आदि कुरितियां को समाप्त करनी होंगी। समानता की दृष्टि से आगे बढ़ना होगा।
न्याय की परिभाषा को जिंदा रखने के लिए 20 फरवरी को विश्व सामाजिक दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी। इसका उददेश्य समाज के हर व्यक्ति और हर वर्ग को सामान्य अधिकार प्रदान करने है। शिक्षत तबके की जिम्मेदारी है कि वह अशिक्षित और वंचित वर्ग के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करें। इससे विश्व सामाजिक न्याय दिवस की सार्थकता समझ में आएगी। हर एक कुरिति समाप्त करने की कोशिश रहेगी। व्यवस्था में सुधार भी होगा। यह कहना है न्याय का पाठ पढ़ाने वाले विशेषज्ञों का।
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उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना होगा। लिंग भेद, दहेज प्रथा, महिला हिंसा, नशाखोरी, भ्रूण हत्या आदि कुरितियां को समाप्त करनी होंगी। सामानता की दृष्टि से आगे बढ़ना होगा। तभी विश्व सामाजिक न्याय दिवस की परिकल्पना संभव है।
सभी जरूरमंदों छात्र के लिए स्कूलों में छात्रवृत्ति का प्रावधान
जम्मू विश्वविद्यालय के विधि विभाग के शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों के लिए निशुल्क वर्दी, पुस्तकें वितरित करने और छात्रवृत्ति का प्रावधान होता था। जरूरतमंद छात्रों को लाभ दिया जाता था। ताकि, गरीबी के रेखा का असर उनकी पढ़ाई पर न पड़े। लेकिन अब स्कूलों में सिर्फ मैधावी छात्रों को छात्रवृत्ति दी जा रही है।
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पढ़ाई की इच्छा जाहिर करने वाले लाभों से वंचित रहते हैं। अपनी मंजिल तक पहुंचने में उन्हें मश्किलों का सामना करना पड़ता।उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमीर परिवारों के छात्रों निजी स्कूलों में होती है। जहां शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता कम होती। वह छात्रों को गुुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्रदान करते। उन्होंने कहा कि सभी को बराबर सुविधाएं देने का सुझाव दिया।
गरीब छात्रों की पढ़ाई हो, निजी स्कूलों में शुल्क अदा करे सरकार
जम्मू विश्वविद्यालय के शिक्षाविद डॉ. राज संधु ने कहा कि स्कूल सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं होते। इसलिए भी होते हैं कि युवा भविष्य नौकरी पा सकें। लेकिन मौजूदा समय में पढ़ाई ही करवाई जाती है। नौकरी के लिए छात्रों को तैयार नहीं किया जाता। गरीब छात्रों के लिए सरकारी और अमीर परिवार के छात्रों के लिए निजी स्कूल रखे गए हैं। इसी कारण गरीब छात्र निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था को शुरू किया जाए। उसमें प्रावधान रखना चाहिए कि गरीब परिवार के जो छात्र निजी स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं। उनकी शुल्क अदा करें।