विश्व बैंक ने बुधवार को सिंधु जल संधि के तहत आने वाली किशनगंगा और रैटल जल विद्युत परियोजनाओं पर भारत और पाकिस्तान के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए कुछ विकल्प सुझाए हैं। विश्व बैंक की सीईओ क्रिस्टेलिना जॉर्गिवा ने यहां वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कुछ विकल्प सुझाए हैं।
हालांकि अधिकारियों ने इस पर विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इसे सार्वजनिक करने से पहले सरकार के उच्च प्रतिनिधियों द्वारा पहले विचार-विमर्श किया जाएगा। विश्व बैंक के प्रतिनिधि इआन सालोमोन भी 30 मिनट की इस बैठक में मौजूद थे।
सोलोमोन इस मसले पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए 5 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी के दौरे पर थे। बैठक में विदेश मंत्रालय और जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने शिरकत की। सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान जॉर्गिवा द्वारा सुझाए गए विकल्पों को सुना गया। हालांकि भारत का इस मसले पर अपना रुख अमूमन पहले ही जैसा है। लिहाजा जॉर्गिवा ने एक सकारात्मक पहल के लिए हमें कुछ विकल्प सुझाए हैं।