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जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लेगेंगे

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भविष्य में कोरोना जैसी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा रहा है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और अन्य संसाधनों को जुटाया जा रहा है। कोरोना महामारी के दौरान कोविड और गैर कोविड अस्पतालों में सबसे अधिक जरूरत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की महसूस की गई। इसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर के सभी बीस जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने 150 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसी साल प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के लिए स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू ने संभाग के सभी दस जिलों के प्लांट के लिए डीपीआर तैयार कर ली है। स्वास्थ्य निदेशालय कश्मीर दस जिलों के लिए डीपीआर बना जा रहा है। इसके साथ पुराने और नए जीएमसी और उनके एसोसिएटेड अस्पतालों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। प्लांट को प्राथमिकता पर स्थापित करने के लिए कवायद तेज की गई है। इसके लिए मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त अटल डुलू लगातार निगरानी कर रहे हैं। जिला अस्पतालों में खुद के ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लग जाने से जिला स्तर से सिलेंडर के लिए उन्हें जम्मू के स्टोर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
बेड की क्षमता के मुताबिक सप्लाई होते हैं सिलेंडर
मौजूदा समय में ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए संभाग के सभी दस जिलों के जिला अस्पतालों को स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू के स्टोर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संबंधित सीएमओ सिलेंडर की मांग करते हैं। बेड की क्षमता के मुताबिक सिलेंडर सप्लाई किए जाते हैं। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से प्रतिदिन जिला अस्पतालों के लिए 25 से 30 सिलेंडर भेजे जा रहे हैं। कोरोना के दौरान केंद्र और जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन की ओर से स्वास्थ्य निदेशालय को डी डाइप में 439 और बी टाइप में 1100 से अधिक सिलेंडर मुहैया करवाए गए हैं। इनमें 80-90 फीसदी सिलेंडर एडवांस में भेज दिए गए हैं। इसके अलावा 640 ऑक्सीजन कंसनट्रेटर सिलेंडर मुहैया करवाए गए हैं, इन सिलेंडर को भी बड़ी मात्रा में जिला अस्पतालों में भेजा गया है। यह ऑक्सीजन कंसनट्रेटर खुद ही ऑक्सीजन सृजत करता है और इसे सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. रेणु शर्मा के अनुसार ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के लिए दस जिलों के लिए डीपीआर बनाई जा रही है। अधिकांश डीपीआर तैयार कर ली गई है। उम्मीद है इसी साल प्लांट स्थापित हो जाएंगे।
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तीन किस्म के होते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर
प्रदेश के अस्पतालों में तीन तरह के ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत होती है। इसमें एक सिलेंडर डी टाइप होता है, इसकी खपत बल्क में होती है और इसमें 4 क्यूबिक मीटर प्रेशर के साथ सप्लाई रहती है। यह सिलेंडर बड़ा होता है और इसे पाइप के माध्यम से अधिक मात्रा में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य से अधिक इस्तेमाल होने वाला ऑक्सीजन सिलेंडर बी टाइप 1.4 क्यूबिक मीटर होता है, जो बेड के साथ रखकर मरीज को लगाया जाता है। इसी तरह पिन टाइप ए सिलेंडर 0.70 क्यूबिक मीटर होता है और इसे अधिकतर शिशु रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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