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फायरिंग रेंज के लिए नई जमीन का अधिग्रहण नहीं

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अखनूर के क्लीथ फायरिंग रेंज को लेकर उठे विवाद पर डिप्टी कमिश्नर सिमरनदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि कोई नई जमीन अधिग्रहण नहीं होगी। डीसी ने कहा कि सेना की ओर से क्लीथ रेंज के लिए कोई जमीन अधिग्रहण नहीं की जा रही।
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31 दिसंबर 2015 को जारी एसआरओ 462 में ‘युद्धाभ्यास, फायरिंग और तोपखाना अभ्यास अधिनियम 1938’ के तहत सरकार की ओर से सेना को अभ्यास के लिए फायरिंग रेंज दिया है।

अधिसूचना के तहत 11 लाख 46 हजार कनाल जमीन उन्हीं गांवों की है, जो वर्ष 1979 में जारी एसआरओ 251 के तहत दी गई थी। वर्ष 1995 में यह अधिसूचना फिर से एसआरओ 38 के तहत जारी हुई थी, जो 2014 में समाप्त हो गई।
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कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को भड़काया: डीसी

फिर से उसी जमीन की अधिसूचना जारी करने के लिए लोगों से आब्जेक्शन मांगे गए थे। डीसी ने स्पष्ट किया कि हाल ही में जारी एसआरओ फायरिंग रेंज के पुन: अधिसूचना की ही औपचारिकता है।

फायरिंग रेंज पूर्व के स्थान पर ही रहेगी। इसके अलावा कोई नई जमीन अधिग्रहण नहीं की जाएगी। ग्रामीण को नई अधिसूचना इसलिए जारी की जाती है, ताकि यदि कभी कोई मुआवजा या भत्ता जारी किया जा सके।

डीसी ने कहा कि गृह विभाग से वर्तमान में जारी एसआरओ प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया था। लेकिन कुछ गलत लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को भड़काया और उन्हें दिगभ्रमित किया। इससे लोगों में बेवजह भय बना।

डीसी ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह तत्काल इलाके के लोगों के साथ बैठक कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करवाएं। सेना पिछले 40 सालों से जिस क्लीथ फायरिंग रेंज का उपयोग कर रही है, सिर्फ वही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।

डीसी ने इस संबंध में चौकी चौरा, अखनूर और खौड़ के एसडीएम के अलावा अखनूर, ज्यौड़ियां, चौकी चौरा, खाराबल्ली और खौड़ के तहसीलदार तथा सहायक राजस्व आयुक्त के साथ बैठक भी की।
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