फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए, क्यों आतंकियों ने उरी कैंप पर किया था हमला?

विज्ञापन
विज्ञापन
सेना के आयुध भंडार और तोपखाने आतंकियों के निशाने पर हैं। इसके चलते ही कठुआ और सांबा में सेना के आयुध भंडारों पर फिदाइन हमलों के बाद आतंकियों ने बीते शुक्रवार को उड़ी आयुध भंडार को भी निशाना बनाने की कोशिश की। उड़ी के जिस मोहरा कैंप पर फिदायीन हमला हुआ वहां सेना का आयुध भंडार है।
विज्ञापन


इस कैंप में बड़ी संख्या में टैंक हैं और यह तोपखाना भी है। कारगिल युद्ध में जिस बोफोर्स तोप ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे उसका बड़ा बेस इसी कैंप में है। गोला-बारूद और अन्य हथियारों को ही लक्ष्य कर आतंकियों ने इस कैंप पर धावा बोला था। लश्कर-ए तैयबा के प्रशिक्षित आतंकी पक्की सूचना के आधार पर बड़ी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए थे।

अगर उन्हें सफलता मिलती तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीनगर दौरा और तीसरे चरण के मतदान पर असर पड़ सकता था। 26 सितंबर 2013 को सांबा में सेना के कैंप और थाने पर पर हुए आतंकी हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत सेना, पुलिस के आठ जवान और दो नागरिक शहीद हो गए थे। तीनों आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया था।
विज्ञापन

कठुआ, सांबा के बाद उड़ी में भी हमला

इसके अलावा 28 मार्च को कठुआ में सेना के आयुध भंडार को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले में  एक जवान और नागरिक शहीद हो गए थे जबकि तीन आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया था।  

सुरक्षा एजेंसियां भी मानती हैं कि ऐसा हमला बिना पूर्व तैयारी के संभव नहीं है। जाहिर है आतंकी संगठन लश्कर-ए तैयबा ने इसके लिए महीनों पहले तैयारी शुरू की होगी। आतंकी संगठन के पास इस कैंप में आयुध भंडार की पक्की सूचना भी थी।

तभी इसी कैंप को निशाना बनाया गया। आतंकियों के पास से नाइट विजन उपकरण और रेडियो सेट भी बरामद हुए। उनके पास कम से कम 15 दिन तक लड़ाई जारी रखने के लिए सूखा रसद उपलब्ध था।

चूंकि चुनाव के लिए सेना पहले से अलर्ट पर है इसलिए छह घंटे में ही आतंकियों को ढेर कर उनकी नापाक योजना को विफल कर दिया गया। आतंकियों ने आयुध भंडार पर कब्जा कर बड़ी क्षति पहुंचाने की रणनीति बनाई थी।
विज्ञापन

नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकियों के 42 कैंप

गौरतलब है कि इससे पहले आतंकियों ने कठुआ और सांबा के जिन सैन्य कैंपों पर फिदायीन हमले किए थे, उन दोनों शिविरों में भी सेना के आयुध भंडार हैं। अब तक तीन फिदायीन हमलों में हर बार निशाना आयुध भंडार वाले कैंप ही रहे हैं।

सैन्य सूत्रों का कहना है कि बार्डर और नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकियों के 42 कैंप हैं। उन कैंपों में लगभग 1600 प्रशिक्षित आतंकी मौजूद हैं। इस तरह हर कैंप में औसतन 40 से 50 आतंकी हैं जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने बाकायदा प्रशिक्षण दिया है।

कठुआ, सांबा और अब मोहरा सैन्य शिविर पर हुए हमले में आतंकियों ने जिस अंदाज में शिविरों में घुसपैठ की, वह दुश्मन सैनिक की तर्ज पर था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें