यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामे के जरिए दावा किया है कि वह आतंकवादी नहीं, बल्कि भारत की छह सरकारों, वीपी सिंह से लेकर मनमोहन सिंह तक द्वारा कश्मीर मुद्दे पर शांति वार्ता में शामिल किया गया था। उसका कहना है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन स्पेशल डायरेक्टर अजीत डोभाल ने 2000 के दशक की शुरुआत में जेल में उससे मुलाकात की और वाजपेयी सरकार की तरफ से शांति प्रक्रिया में हिस्सा लेने का प्रस्ताव दिया था।
मलिक का दावा है कि इसके बाद उसे आईबी डायरेक्टर श्यामल दत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से भी मिलवाया गया, जिन्होंने रमजान के दौरान सीजफायर को लेकर उसका समर्थन मांगा।
वैद ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा,हाफिज सईद जैसे भारत विरोधी और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन के सरगना से बात करने के लिए एक कातिल को भेजना, ये कैसी कूटनीति थी? मैं देश की जनता पर छोड़ता हूं कि वे तय करें उन्हें कैसी सरकार चाहिए।
यासीन मलिक उम्रकैद की सजा काट रहा है और एनआईए ने उसके लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की है। मलिक ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि उसे शांति प्रयासों का हिस्सा बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हीं मुलाकातों को षड्यंत्र की तरह पेश किया गया।