- समतल इलाकों में बारिश कम, बढ़ गई उमस, फसलों के लिए खतरा
- कंडी इलाकों में बारिश खेती के लिए फायदेमंद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू, सांबा और कठुआ के मैदानी इलाकों में जून, जुलाई और अगस्त में कम बारिश हुई है। इससे उमस बढ़ रही है जिसका असर खेती पर पड़ेगा। फसलें बीमारी की चपेट में आ सकती है। कंडी इलाकों में बारिश फसलों के लिए फायदेमंद है। बिजाई से पहले बारिश नहीं हो रही थी। इस कारण किसान चिंतित थे, लेकिन जुलाई में बारिश होने का क्रम शुरू हुआ। इससे खेतों में नमी है। धान, मक्का, दालों के लिए यहां पर बारिश से पैदावार अच्छी होने की संभावना बढ़ गई है।
शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्काॅस्ट) जम्मू के अनुसार जम्मू जिले में जून में 60 मिलीमीटर (एमएम) बारिश हुई जबकि 87 मिलीमीटर तक होने की संभावना थी। जुलाई में 275 एमएम बारिश हुई, संभावना 322 एमएम की जताई गई थी। अगस्त में अब तक 30.8 एमएम बारिश हुई है जबकि संभावना 326 एमएम की है। बारिश कम होने से धान, मक्का सहित अन्य फसलें बीमारी की चपेट में आ सकती हैं। कठुआ में जून में 60 एमएम बारिश हुई, संभावना 87.7 एमएम की थी। जुलाई में यहां 392 एमएम बारिश हुई। 322 एमएम की संभावना थी। अगस्त में अब तक 181 एमएम बारिश हुई है, संभावना 326 एमएम की है। यही हाल सांबा जिला का रहा है। यहां पर भी संभावना से कम कम हुई है। स्काॅस्ट के अनुसार आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को नुकसान नहीं होगा।
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इन बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं फसलें
धान की फसल थ्रेडवर्म की चपेट में आ सकती है। मक्का पर तना छेदक और फाॅल आर्मीवर्म से का प्रभाव पड़ सकता है।
मैदानी इलाकों में बारिश सामान्य से कम हुई है। उमस बढ़ी है। यह फसलों के लिए हानिकारक हो सकता है। फसलों के लिए बारिश जरूरी है।
- डाॅ. महेंद्र सिंह, इंचार्ज, कृषि मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र, स्काॅस्ट जम्मू