सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह स्पष्ट कर दिया कि वह जम्मू-कश्मीर सरकार की बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत और पुनर्वास कार्य के लिए 44000 करोड़ रुपये की मांग पर केंद्र को तत्काल निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू और जस्टिस एके सीकरी की पीठ ने कहा कि हम कल ही निर्णय लेने के लिए केंद्र को बाध्य नहीं कर सकते हैं।
पीठ ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि वित्त मंत्रालय और योजना आयोग इस मामले पर उचित निर्णय लेगा। प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास के लिए केंद्र से 44000 करोड़ रुपये की मांग की थी। केंद्र ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राज्य सरकार को 1700 करोड़ रुपये सहायता का ऐलान किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक किए गए राहत और पुनर्वास के कार्यों की समीक्षा करने को कहा है।
पीठ ने कहा कि आप इस स्थिति में हैं कि ये बता सकते हैं कि अब तक क्या किया गया है। पीठ ने 24 नवंबर की अगली सुनवाई पर अब तक किए गए काम पर रिपोर्ट भी मांगी है।