- जैन बाजार, वेयरहाउस, जुल्लाका, पीरखो, पुरानी मंडी, उस्ताद मोहल्ला में जलसंकट
- गोरखा नगर, बाहुफोर्ट में राहत, बहाल हुई आपूर्ति, बठिंडी में टैंकरों से आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जलशक्ति विभाग का दावा है कि पंजतीर्थी, सितली और बोरिया में स्टोरेज टैंकों में पानी फुल है। शहर में पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। जमीनी स्तर पर वेयरहाउस व पुराने शहर के अधिकतर इलाकों में अभी भी पेयजल संकट है। डिवीजन दो में गोरखा नगर, राजीव काॅलोनी सहित कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। बठिंडी में टैंकरों से आपूर्ति हुई है। सुजवां और आसपास के इलाकों में भी 20 मिनट तक नलों से पानी दिया जा रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी पुराने शहर में है। जुल्लाका मोहल्ला के रहने वाले मंटू ने कहा कि तीन दिन पहले दस मिनट के लिए पानी आया था। अब पानी के लिए अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है मगर समस्या हल नहीं हो रही। उस्ताद मोहल्ला के रशीद ने बताया कि 26 अगस्त से ही समस्या आ रही है। चार दिन पहले दस मिनट पानी आया। इसके बाद नल सूखे हैं। कई बार प्रदर्शन किया गया है। वार्ड-48 के पूर्व पार्षद शाम लाल बसन ने कहा कि लोग काफी परेशान थे। मंगलवार को समस्या हल हुई है। बाजीगर बस्ती, कालिका कालोनी सहित कई इलाकों में नलों से पानी आया है। पहले टैंकरों से आपूर्ति हो रही थी। वेयरहाउस के साथ लगते सुंदर मोहल्ले में पानी का संकट बरकरार है। संजय शर्मा, सुधार शर्मा ने बताया कि जलशक्ति विभाग से संपर्क किया गया तो अधिकारियों ने तर्क दिया कि बिजली संकट हो गया है।
शहर में 50 साल पुराने पाइप नहीं बदले गए
जलशक्ति विभाग 50 साल पुराने पाइपों को अभी तक नहीं बदल पाया है। इससे भी शहर में पानी की किल्लत आ रही है। पुराने पाइप क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बारिश के बाद नलों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। पुराने शहर में दस से ज्यादा वार्डों में पेयजल संकट है। विभाग भी पानी की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा। सरकार ने भी पुराने ढांचे को बदलने के लिए मांग को गंभीरता से नहीं लिया है। पहले वार्डों में पाइप बदलने का काम शुरू हुआ मगर हर वार्ड के लिए 15 लाख रुपये ही मिले। इस कारण भी काम सिरे नहीं चढ़ पाया है।
पुराने शहर में कई जगहों में आपूर्ति कर दी है। जहां पर नहीं आ रहा है, इन जगहों को चेक किया जाएगा। फिलहाल मेन लाइनों तक पानी पहुंच रहा है। समस्या का निदान कर नलों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
- तेजिंद्र सिंह, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग