तापमान बढ़ने के साथ साथ जम्मू शहर और संभाग के ग्रीष्मकालीन जोन के इलाकों में बिजली व पानी का संकट गहराने के आसार है। ऐसा इसलिए हैं कि बिजली पानी की मांग जिसे तेजी से बढ़ रही है विभाग के पास उपलब्धता जरूरत को पूरी करने लायक नहीं है।
रियासत में बिजली की मांग बढ़कर 2700 मेगावाट से भी पार जा चुकी है। जबकि बिजली खरीदने के बावजूद भी विभाग के पास उपलब्धता 1500 से 1600 मेगावाट के बीच ही है। अंतर को कम करने के लिए विभाग की ओर से शेड्यूल कटौती की जाती है। बिना इलेक्ट्रानिक मीटर लगे इलाकों में प्रतिदिन आठ घंटे की कटौती का शेड्यूल रहता है।
जबकि इलेक्ट्रानिक मीटर लगे इलाकों में कटौती का शेड्यूल तो नहीं है लेकिन अघोषित कटौती पांच से लेकर दस घंटे तक गर्मियों में होती है। इसका सिलसिला गर्मी शुरू होने के साथ ही शुरू भी होने लगा है। इसी तरह जम्मू शहर में ही पेयजल की मांग करीब 46 मिलियन गैलन डेली है।
जबकि सभी स्त्रोतों से उपलब्धता करीब 44 मिलियन गैलन के आसपास ही है। गर्मी के मौसम में श्री अमरनाथ यात्रा के अलावा अन्य धार्मिक यात्राओं के शुरू होने के बाद पेयजल की मांग में ओर भी इजाफा हो जाएगा। इसके अलावा बिजली कटौती की वजह से भी पेयजल आपूर्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है।