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जम्मू में गहराया जल संकट, हड़ताल 72 घंटे तक बढ़ी

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जम्मू संभाग के सभी दस जिलों में मंगलवार को पेयजल संकट और गहरा गया जब पीएचई को कर्मचारियों ने हड़ताल को और 72 घंटों के लिए बढ़ा दिया।
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विभाग के करीब तीस हजार मुलाजिमों की काम छोड़ हड़ताल के पहले दिन ही लोग बूंद-बूंद के लिए तरस गए थे। राजभवन, मुख्यमंत्री निवास और जम्मू विश्वविद्यालय तक में आंशिक रूप से टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति ही हो पाई।

पीएचई विभाग के टैंकर ड्राइवरों के हड़ताल को समर्थन की वजह से हालात और खराब रहे। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के जम्मू दौरे की वजह से विभाग के आला अधिकारियों के कार्यक्रम में व्यस्त रहने की वजह से हड़ताली मुलाजिमों से वार्ता भी शुरू नहीं हो सकी थी।
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हड़ताल को और 72 घंटों के ल‌िए बढ़ाया

मंगलवार को सुबह दस बजे बीसी रोड पर हड़ताली मुलाजिमों की बैठक हुई। जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति के तहत ये तय क‌िया गया क‌ि इस हड़ताल को और 72 घंटों के ल‌िए बढ़ाया जाएगा। हालांकि हड़ताल मंगलवार सायं आठ बजे तक की थी।

पीएचई वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन के झंडे तले हुई हड़ताल को विभाग के 14 हजार के करीब स्थायी कर्मचारियों के अलावा 16703 अस्थायी मुलाजिमों का समर्थन होने से काम छोड़ हड़ताल का व्यापक असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा। संभाग भर में हड़ताल की वजह से पेयजल आपूर्ति लगभग ठप होकर रह गई।

एसोसिएशन के महासचिव सुभाष वर्मा ने कहा कि अस्थायी मुलाजिमों को नियमित करने के लिए नीति निर्धारित करने और उनका लंबित वेतन जारी करने की प्रमुख मांग को लेकर कर्मचारियों ने पिछले काफी अर्से से धरना प्रदर्शन से लेकर भूख हड़ताल तक की।

इसके बावजूद मसले का हल न होने पर आखिरी विकल्प के तौर पर काम छोड़ हड़ताल की गई है। पीएचई विभाग जम्मू के चीफ इंजीनियर सुशील आइमा का कहना है कि मुलाजिमों की हड़ताल के चलते पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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