हर व्यक्ति की तमन्ना होती है कि उसकी सरकारी नौकरी लगे, ताकि वह अपने परिवार की जरूरतों को सही तरीके से पूरा कर सके। लेकिन, खौड़ के मंजीत ऐसा नहीं सोचते।मंजीत कुमार ने बताया कि 1993 से हायर सेकेंडरी स्कूल खड़ाह में बतौर सफाई कर्मी काम कर रहे। मंजीत के मुताबिक 20 रुपये वेतन मिलते थे। वर्ष 2010 के आसपास से वह 50 रुपये पगार पा रहे।
यानी सरकार ने सत्रह साल में मंजीत के वेतन में 30 रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी। हालांकि अब सरकार को मंजीत को 50 रुपये पगार देना भी गंवारा नहीं। इसलिए वह पिछले एक साल से स्कूल में बतौर बेगार काम कर रहे।
मंजीत ने बताया कि 1993 से पहले उनकी मां चन्नो देवी भी 20 रुपये महीने की पगार पर काम करती थीं। 1985 से 1993 तक वह काम करती रहीं। लेकिन, एक पैसा वेतन नहीं बढ़ाया गया। उम्र ज्यादा होने पर जब वह काम करने लायक नहीं रहीं, तो मंजीत काम पर जाने लगे। मंजीत ने सरकार से मांग की है कि उनकी पगार बढ़ाई जाए, ताकि वह परिवार की जरूरतों को सही तरीके से पूरा कर सके।
इस संबंध में स्कूल के प्रिंसिपल आरडी वर्मा ने कहा कि वे 2014 से स्कूल में हैं। लेकिन, हम इस संबंध में कुछ नहीं कर सकते हैं। कई दफा उच्च अधिकारियों को इस बारे में लिखा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। इससे ज्यादा कर क्या सकते हैं।