अब मतदाताओं के रिकार्ड के साथ उनके ‘आधार कार्ड’ का डाटा जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। देशभर में चलने वाले नेशनल इलेक्टोरल रोल प्यूरीफिकेशन एंड आथेंटिकेशन प्रोग्राम की तरह रियासत में भी 12 अप्रैल से बीएलओ स्तर पर विशेष कैंप आयोजित कर लोगों के आधार कार्ड का डाटा जोड़ा जाएगा।
इस तरह के विशेष कैंप प्रत्येक माह आयोजित होंगे। जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) उमंग नरूला ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आधार डाटा मतदाताओं के रिकार्ड से जुड़ने के बाद उन्हें काफी सहूलियत होगी।
हालांकि सीईओ ने इस बात से इंकार किया कि भविष्य में चुनावी कार्ड (ईपीआईसी) के स्थान पर आधार कार्ड शुरू करने की कोई योजना है। नरूला ने कहा कि ईपीआईसी वैसे ही जारी रहेगा, लेकिन आधार नंबर जुड़ने से फर्जी मतदाताओं पर नकेल डाली जा सकेगी।
साथ ही मतदाता का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी विभाग के रिकार्ड में होगा। इससे मतदाताओं को निर्वाचन आयोग की सूचना एसएमएस और मेल आईडी से मिल पाएगी। मतदाता अपने आधार कार्ड की जानकारी विभाग के हेल्प लाइन नंबर (1950) के अलावा विभाग की वेबसाइट पर भी दर्ज करवा सकते हैं।
रियासत में अभी ज्यादातर लोगों के आधार कार्ड नहीं बन पाए हैं। इस पर सीईओ ने कहा कि रियासत में आधार बनाने का काम अन्य राज्यों के मुकाबले थोड़ा धीमा है, लेकिन विभाग अपने मिशन पर जुट गया है। अब तक रियासत में 45 फीसदी लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं। इनमें 18 साल से ज्यादा उम्र के 35 लाख लोग हैं।