कश्मीर में बने माहौल में असमंजस की स्थिति में सियासत केवल बयानबाजी तक ही सीमित होकर रह गई है। पिछले 34 दिनों से कर्फ्यू से जनजीवन पटरी से उतरने के अलावा जमीनी स्तर पर सियासी गतिविधियां लगभग ठप सी हो गई हैं। विकास, शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा कई अहम फैसले भी हालात की भेंट चढ़ चुके हैं।
मुख्य धारा की सियासी पार्टियों के नेताओं के अनुसार कश्मीर में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कश्मीर अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आतंकवाद और अलगाववाद को छोड़ दिया जाए तो जो लोग मुख्यधारा से जुड़े हुए थे, वे भी अलग-थलग पड़े हुए हैं।
जमीनी स्तर पर सियासी गतिविधियां लगभग ठप हैं। नेता लोग केवल बयान जारी करके ही सियासत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक गतिविधियां थमी हुई हैं। सड़कें सुनसान रहने से जनजीवन पटरी से उतरा हुआ है।