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कश्मीर हिंसा: असमंजस की स्थिति में केवल बयानबाजी की सियासत

Fri, 12 Aug 2016 11:56 AM IST
संजीव दुबे, अमर उजाला/जम्मू
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घाटी में कर्फ्यू जारी - फोटो : Amar Ujala
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कश्मीर में बने माहौल में असमंजस की स्थिति में सियासत केवल बयानबाजी तक ही सीमित होकर रह गई है। पिछले 34 दिनों से कर्फ्यू से जनजीवन पटरी से उतरने के अलावा जमीनी स्तर पर सियासी गतिविधियां लगभग ठप सी हो गई हैं। विकास, शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा कई अहम फैसले भी हालात की भेंट चढ़ चुके हैं। 
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मुख्य धारा की सियासी पार्टियों के नेताओं के अनुसार कश्मीर में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कश्मीर अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आतंकवाद और अलगाववाद को छोड़ दिया जाए तो जो लोग मुख्यधारा से जुड़े हुए थे, वे भी अलग-थलग पड़े हुए हैं।

जमीनी स्तर पर सियासी गतिविधियां लगभग ठप हैं। नेता लोग केवल बयान जारी करके ही सियासत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक गतिविधियां थमी हुई हैं। सड़कें सुनसान रहने से जनजीवन पटरी से उतरा हुआ है।
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संव‌िधान के दायरे में ही वार्ता संभव

सु्रक्षा के कड़े इंतजाम - फोटो : PTI
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में हालात को पटरी पर लाने की इच्छा शक्ति की कमी है। इस वजह से हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते चले गए।

कांग्रेस हालात खराब होने के शुरू से ही सर्वदलीय बैठक राष्ट्रीय स्तर पर करने की बात कर रही थी। मोदी सरकार को यह काफी देर बाद समझ आई। हालात को सुधारने के लिए इच्छा शक्ति के साथ दूरदर्शिता के साथ नीतिगत फैसले लेने की जरूरत है। वार्ता का दौर शुरू होना चाहिए। 

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सत शर्मा का कहना है कि भारतीय संविधान के दायरे में ही वार्ता संभव है। केंद्र सरकार अपना पक्ष साफ कर चुकी है। कश्मीर में हालात जल्द सामान्य करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
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