विजिलेंस कमीशन ने राज्य के कई विभागों में फैले भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पिछले एक साल में आयोग के पास सबसे अधिक शिकायतें ग्रामीण विकास विभाग, इंजीनियरिंग से जुड़े विभागों, सीएपीडी और राजस्व विभाग से संबंधित आईं। वीरवार को विधानसभा और विधान परिषद में आयोग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रकार की शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को पांच सूत्रीय सुझाव भी दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक खंड विकास अधिकारियों और इनसे जुडे कर्मचारियों के खिलाफ मनरेगा और एमजी योजनाओं के तहत अलाट कामों के अलावा इंदिरा आवास योजना से संबंधित शिकायतें ग्रामीण विकास विभाग के संबंध में मिली।
इंजीनियरिंग विभागों में सबसे अधिक शिकायतें उन कामों से संबंधित मिली, जो जमीन पर हुए ही नहीं। इसके अलावा बगैर टेंडर और विभागीय स्तर पर हुए निर्माण कार्यों की शिकायतें भी अधिक पाई गईं। सीएपीडी विभाग में सबसे अधिक शिकायतें राशन घोटाले, एपीएल और बीपीएल राशन जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचने की मिलीं।
राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतें रिकार्ड में छेड़छाड़ और हेराफेरी पर आधारित थीं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार को ऐसी शिकायतों अथवा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सुझाव भी दिए हैं। इनमें अवाम को बेहतर और जल्द सेवा मुहैया कराना, अवाम को आनलाइन सेवाएं मुहैया कराना, स्रोतों का निर्धारित अवधि में अधिक से अधिक इस्तेमाल और अवाम की प्रशासन में उपस्थिति को बढ़ाना शामिल हैं।
इसके अलावा भ्रष्टाचार रोकने के लिए सेमिनारों, वर्कशापों और जागरूकता शिविरों के आयोजन को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।