जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में बैकअप सिस्टम कमजोर पड़ने से बिजली संकट गहरा रहा है। इन अस्पतालों में बैकअप के लिए सारा दारोमदार जेनरेटरों पर है, लेकिन जेनरेटरों में तकनीकी समस्या बढ़ने से बैकअप पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
रेशमघर स्थित एम्स की तर्ज पर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सपोर्टिगिं बैकअप सिस्टम के लिए ओसिलेटर नहीं लगाए जा सके हैं। इस अस्पताल में पिछले साल नवंबर में आग लगने से यूपीएस बैंक की 117 बैटरियां जलकर राख हो गई थीं।
इससे कई दिन अस्पताल का अधिकांश हिस्सा अंधेरे में रहा था। इस बीच जीएमसी में तीसरे दिन बुधवार को रुटीन आपरेशन शुरू कर दिए गए। जीएमसी में इमरजेंसी सहित अन्य यूनिटों में बैकअप सिस्टम के लिए चार जेनरेटरों से बिजली सप्लाई दी जाती है।
लेकिन डीजल की कमी और अधिक कटौती के चलते जेनरेटरों को नियमित चलाना मुश्किल हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से आपरेशन के दौरान बैकअप न मिलने से कई मुश्किलें आईं। यही नहीं, आईसीयू में वेंटिलेटर तक बंद पड़ गए।
इसी तरह एसएमजीएस अस्पताल में भी डीजल की कमी बनी हुई है। एसोसिएटेड अस्पतालों में डीजल की किल्लत के बीच किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। घंटों की कटौती के दौरान बैकअप में बिजली सप्लाई बहाल नहीं रखी जा पा रही है।