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Jammu: वीडीजी बनेंगे आतंक का काल, सीमा से जंगल तक साजिशों का टूटेगा जाल, सेना-पुलिस दे रही विशेष प्रशिक्षण

Mon, 05 Jan 2026 12:36 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और बदलते सुरक्षा खतरों को देखते हुए ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है। 
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डोडा के देसा में वीडीजी सदस्यों को प्रशिक्षण देती सेना व पुलिस। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सीमा पार से घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों की नई चुनौतियों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा का परिदृश्य बदल दिया है। युद्ध के इन बदलते स्वरूपों और उभरती चुनौतियों के बीच अब ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है। जम्मू संभाग में बीते तीन वर्षों में बढ़ी आतंकी गतिविधियों को देखते हुए पुलिस, सेना और बीएसएफ अब वीडीजी सदस्यों को फर्स्ट रिस्पोंडर (प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली इकाई) के रूप में तैयार करने के लिए त्रि-स्तरीय विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।

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पिछले तीन वर्षों में रामबन को छोड़कर जम्मू संभाग के लगभग सभी जिलों में आतंकी मुठभेड़ हुई हैं। किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ जैसे जिलों के दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में आतंकियों की सक्रियता सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। चूंकि इन इलाकों में सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले स्थानीय ग्रामीण ही मौके पर मौजूद होते हैं इसलिए वीडीजी को सशक्त बनाना अनिवार्य हो गया है। वीडीजी को प्रशिक्षण के तहत एसएलआर जैसे सेमी-ऑटोमेटिक हथियारों के इस्तेमाल, आतंकी हमले की स्थिति में त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया जा रहा है।

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डीजीपी मिल चुके हैं वीडीजी सदस्यों से:
पुलिस से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि गत नवंबर में डीजीपी नलिन प्रभात ने उधमपुर, कठुआ, सांबा और जम्मू जिले के वीडीजी सदस्यों से मुलाकात की थी। उन्होंने उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझा था। डीजीपी ने पुलिस को वीडीजी सदस्यों को अच्छे हथियार मुहैया करवाने के साथ उन्हें प्रशिक्षण देने का भरोसा दिया था। इसी क्रम में प्रशिक्षण के साथ नए युवाओं को जोड़ा जा रहा है।

सीमावर्ती इलाके में हथियार चलाने का प्रशिक्षण देती बीएसएफ। - फोटो : बीएसएफ
छह हजार से अधिक हैं वीडीजी सदस्य
जम्मू-कश्मीर में 1995 में वीडीसी (अब वीडीजी) सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को आत्मरक्षा के लिए तैयार करना था। 2022 में गृह मंत्रालय ने वीडीसी का नाम बदलकर ग्राम रक्षा समूह कर दिया। इसके साथ ही नई सुरक्षा चुनौतियां व जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अहम बदलाव किए। वीडीसी सदस्यों को आधुनिक और सेमी ऑटोमेटिक हथियार दिए गए। इसमें 875 वीडीजी बनाए गए। इनमें करीब छह हजार से अधिक सदस्य शामिल हैं। प्रत्येक वीडीसी में 10 से 15 सदस्य होते हैं। हर गांव में इनका समूह होता है।
 

प्रशिक्षण के ये हैं मुख्य बिंदु
हथियार संचालन: इसके तहत आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल और सटीक निशाना लगाने का प्रशिक्षण।
त्वरित प्रतिक्रिया : आतंकी हमले की स्थिति में वीडीजी सदस्यों की ओर से बिना समय गंवाए प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार करना।
तकनीकी निगरानी: ड्रोन जैसी आधुनिक गतिविधियों की पहचान करना और इसकी सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाना।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ की चुनौती
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ, सुरंग बनाकर घुसपैठ ड्रोन से हथियार व नशीले पदार्थ गिराए जाते हैं। कई बार आतंकी घने कोहरे की आड़ में घुसपैठ करने में कामयाब हो जाते हैं। इससे निपटने में वीडीजी सदस्य अहम भूमिका निभा सकते हैं। इनसे निपटने के लिए बीएसएफ वीडीजी सदस्यों को हथियार संचालन, घुसपैठ की पहचान और ड्रोन ड्रापिंग जैसी नई चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण दे रहा है।

जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की पूरी जानकारी
पहाड़ी और जंगलों में आतंकी लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। ओजीडब्ल्यू इन आतंकियों का साथ देते हैं। डोडा, किश्तवाड़, राजोरी, रियासी, पुंछ, सांबा और कठुआ जिले में वीडीसी सदस्यों का नेटवर्क दूरदराज गांवों तक है। इन क्षेत्रों में पुलिस और सेना वीडीजी सदस्यों को आतंकियों के मुकाबले, ओवरग्राउंड वर्करों की पहचान और शुरुआती प्रक्रिया देने के लिए तैयार कर रही है।
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