जिले के किसान अब से पहले मक्की, गेहूं और धान की फसलों को ही तवज्जो दे रहे थे, लेकिन वर्तमान में फूलों की खेती उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में ज्यादा मददगार साबित हो रही है।
मलोठी गांव के किसान मोहम्मद अशरफ और नागराज ने बताया कि अर्से से मक्की और गेहूं की ही खेती करते थे, जिसमें कम मुनाफा होता था।
उन्होंने बताया कि फ्लोरिकल्चर विभाग ने फसलों के अलावा फूलों को उगाने और उनका व्यापार करने की जानकारी दी। पहले तो विभाग की बातें कुछ खास समझ नहीं आई।
लेकिन जब हमने फूल उगाकर बेचना शुरू किया, तो फसलों से चार गुना अधिक फायदा मिला।
सालाना चार-पांच लाख रुपये का हो रहा फायदा
वर्तमान में 40 से 50 कनाल भूमि पर सिर्फ फूलों की खेती की जा रही है। सालाना 4 से 5 लाख रुपये का फायदा भी हो रहा है। अब परिवार की परवरिश में भी कोई दिक्कत नहीं आती।
फ्लोरिकल्चर अधिकारी अरुण सिंह परिहार ने बताया कि हमने दूर-दराज गांवों में जाकर जागरूकता शिवर लगाए।
किसानों को बागवानी के फायदों के बारे में बताया गया।
हालांकि शुरूआत में किसानों ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब किसान खुद इस बारे में जानना चाह रहे।
इस वर्ष 400 से अधिक किसानों ने फूलों की खेती की इच्छा जताई
पिछले वर्ष 366 किसानों ने फूलों की खेती की। 260 किसानों ने फूलों के बीज सब्सिडी पर लिए। एक-दो वर्ष किसानों को मुफ्त में बीज भी दिए गए।
अब किसान प्रति कनाल फूलों की खेती कर 15000 से 20,000 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। विभाग उन्हें बीजों के साथ-साथ पौली सीट भी उपलब्ध करवा रहा है।
दिल्ली इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर रिसर्च में भी जाने का मौका मिलता है। फ्लोरिकल्चर विभाग के अनुसार क्षेत्रों को आठ हिस्सों में बांटा है। इस वर्ष 400 से अधिक किसानों ने फूलों की खेती की इच्छा जताई है।