जम्मू कश्मीर असेंबली में शनिवार को चौथे दिन कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेस के विधायकों ने 2014 में भयंकर बाढ के पीडितों के अब तक पुनर्वास ना हो पाने का विरोध करते हुए सदन का बहिष्कार किया। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पीडीपी-भाजपा सरकार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने में नाकाम रही है।
वहीं विधानसभा सत्र के तीसरे दिन नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विधायकों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन, हंदवाड़ा फायरिंग में नागरिकों की मौत और नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट को लेकर सदन में हंगामा किया था।
शुक्रवार को जैसे ही स्पीकर सदन में आए और कार्रवाई शुरू करने लगे, तो नेकां और कांग्रेस विधायकों ने इन मुद्दों पर अपनी जगह खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया। इतने में सीपीएम के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी द्वारा भी स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन, उसे स्पीकर ने नामंजूर कर दिया।
विपक्ष इन मुद्दों पर बहस करने की मांग कर रहा था। लेकिन, स्पीकर ने उन्हें कहा कि पहले राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस होगी, उसके बाद देखेंगे। इस पर नेकां और कांग्रेस के सभी विधायक वेल में उतर आए और जमकर हंगामा करने लगे। विधायकों और मार्शलों के बीच धक्का मुक्की भी हुई।
इस बीच, इंजीनियर रशीद भी वेल में हंदवाड़ा हत्याकांड की जांच को लेकर हंगामा करने लगे। रशीद रायशुमारी कराने की भी मांग कर रहे थे। नेकां के अब्दुल मजीद लारमी और अब्दुल जब्बार द्वारा स्पीकर की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन, उन्हें मार्शलों द्वारा जबरदस्ती वापस लाया गया।