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पानी में बह गई वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत

Tue, 16 Sep 2014 10:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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कृषि के क्षेत्र में वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चर साइंसेस एंड टेक्नालाजी (स्कास्ट) कैंपस चट्ठा में बाढ़ के पानी से भारी तबाही में फार्म उपकरण, क्लास रूम और लैबोरेटरी उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। कंप्यूटरों के पानी में डूब जाने से वैज्ञानिकों के शोध के रिकार्ड तबाह हो गए हैं।
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स्कास्ट टीचिंग एसोसिएशन जम्मू की एग्जीक्यूटिव बाडी की बैठक में राज्यपाल से नुकसान के आकलन के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजने के साथ तत्काल अतिरिक्त बजट जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रधान डा. विकास शर्मा ने बताया कि बलोल नाले में बाढ़ से कार्यालय रिकार्ड के साथ वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के रिकार्ड को काफी नुकसान पहुंचा है।

इसमें सबसे ज्यादा क्षति वैज्ञानिकों के शोध से जुड़ी चीजों को पहुंची है। वैज्ञानिकों ने जम्मू डिवीजन में वर्षों का शोध करके कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं लेकिन रिकार्ड के नुकसान की भरपाई कर पाना  मुश्किल है। बाढ़ में करोड़ों रुपये के केमिकल बह गए हैं।
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वैज्ञानिक साहित्य, जर्मप्लाजम, माइक्रोबायल कल्चर भी तबाह हुआ है। कंप्यूटर काम नहीं कर रहे हैं। बाढ़ से डीन कार्यालय, फैकल्टी आफ एग्रीकल्चर को भी नुकसान पहुंचा है। बैठक में राज्यपाल से बाढ़ के नुकसान को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त बजट जारी करने पर जोर दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि पुनर्निर्माण में देरी के चलते कृषि के क्षेत्र में नुकसान होगा। इससे वैज्ञानिकों के शोध किसानों तक नहीं पहुंच पाएंगे, जिससे संभाग में कृषि शिक्षा प्रभावित होगी। बैठक में डा. विवेक एम आर्य, डा. राजीन सांगड़ा, डा. देवेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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