जम्मू-कश्मीर राज्य में असंतुलित पर्यावरण से बड़ी आपदा का खतरा है। बाढ़ और भूकंप के मुआयने पर खड़े इस राज्य में पर्यावरण से छेड़छाड़ को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से काम करने की जरूरत है।
प्राकृतिक जलस्त्रोतों का सूखना चिंता का विषय है। हिमालयन रेंज में संतुलन बनाए रखने के लिए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जम्मू और कश्मीर में बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास कार्य पर्याप्त नहीं हुए हैं।
वर्ष 1993 के बाद पहली बार लद्दाख, कश्मीर और जम्मू का जमीनी स्तर का दौरा करने पहुंची संसदीय स्टैंडिंग कमेटी विज्ञान व तकनीक, पर्यावरण व वन की बैठक में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।