शुरुआती चुनावों में ये सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। कांग्रेस की टिकट से चौधरी लाल सिंह ने 2004 और 2009 के चुनाव में जीत हासिल की थी। अब यह सीट 2014 और 2019 में भाजपा के किले में तब्दील हो गई है। भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2014 और 2019 में लगातार यह सीट जीती। अकाली दल के प्रत्याशी को 1.3 तो
झारखंड पार्टी के उम्मीदर को मिले थे 0.1 फीसदी मत
उधमपुर संसदीय क्षेत्र में 1971 में पंजाब की सिरमौर राजनीतिक पार्टी रही शिरोमणि अकाली दल ने उपना उम्मीदवार उतारा लेकिन, इनका प्रत्याशी प्रीतम सिंह 1.3 फीसदी वोट ही हासिल कर सका। इसके बाद शिअद का कोई उम्मीदवार इस संसदीय सीट पर दावा नहीं जता पाया।
इसके अलावा झारखंड की प्रमुख पार्टी झारखंड पार्टी ने 1999 में अपने उम्मीदवार के तौर पर राजिंदर शर्मा को मैदान में उतारा। उन्हें कुल 0.1 फीसदी वोट मिले। इसके बाद झारखंड पार्टी ने भी खुद को परे कर लिया।
भारतीय लोकदल, जनता दल, प्राउटिस्ट ब्लॉक इंडिया, भारतीय किसान कामगार, समाजवादी, राष्ट्रीय जनता दल, अखिल भारतीय जनसंघ, लोक शक्ति, ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी), सेक्युलर पार्टी ऑफ इंडिया सहित कई पार्टियों की लंबी फेहरिस्त है। इन्होंने एक-एक बार यहां से अपना उम्मीदवार उतार पर कामयाबी नहीं मिली।
14 लोकसभा चुनाव में 8 बार कांग्रेस तो 6 बार भाजपा को प्रतिनिधित्व
उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1989 तक यहां पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा। लगातार 6 बार यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही।
भाजपा का खाता इस सीट पर 1996 में खुला। प्रोफेसर चमन लाल गुप्ता उधमपुर में बीजेपी के पहले सांसद बने। इसके बाद उन्होंने 1998 और 1999 के चुनाव में भी बाजी मारी। 2004 में यहां चौ. लाल सिंह के रूप में कांग्रेस की वापसी हुई। 2014 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह केंद्र सरकार में मंत्री भी बने। उन्होंने 2014 में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को हराया तो 2019 में कांग्रेस के ही विक्रमादित्य सिंह को शिकस्त दी थी। इस सीट पर हुए 14 लोकसभा चुनाव में 8 बार कांग्रेस तो 6 बार भाजपा को प्रतिनिधित्व मिला। इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और पैंथर्स पार्टी को दूसरा या तीसरा स्थान ही हासिल हुआ।