आजादी के 76 साल बाद भी जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आज भी उच्च शिक्षा विशेषकर तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के इच्छुक हजारों युवा देश के विभिन्न राज्यों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश के कई युवा केंद्र और सेना प्रायोजित छात्रवृत्ति योजनाओं के सहारे उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों की तुलना में न तो बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय और न ऐसा पाठ्यक्रम है जो युवाओं में नौकरी लेने का विश्वास पैदा करे सके। 2024 के लोकसभा चुनाव में महिला वोटर के साथ युवा आबादी प्रतिनिधी का चुनाव करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
युवा वर्ग लगातार शिक्षा और रोजगार का रोडमैप सामने रखने वाले प्रतिनिधी की वकालत कर रहा है। लिहाजा चुनाव में यह मुद्दा पार्टियां कितना भुनाएंगी और इस मुद्दे को लेकर 69 फीसद युवा आबादी का रुख क्या रहेगा यह तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा।
अगर जम्मू-कश्मीर में उच्च शैक्षिक परिदृश्य देखें तो केंद्र शासित प्रदेस में कुल दस विश्वविद्यालय और 145 सरकारी कॉलेज हैं। एक-एक आईआईटी, आईआईएम और एक आईआईएमसी जैसे संस्थान हैं। वहीं सिर्फ दो सरकारी इंजीनियरिंग एवं तकनीकी कॉलेज, दो स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर और दो नर्सिंग कॉलेज हैं।
आबादी के हिसाब से यह कम हैं। जम्मू-कश्मीर में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की इसी कमी को देखते हुए 2011 में केंद्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले इच्छुक युवाओं को हर वर्ष छात्रवृत्ति देने का फैसला लिया था। हर वर्ष तीन से चार हजार युवाओं को छात्रवृत्ति दी जाती है ताकि वह देश के अन्य हिस्सों के युवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।
बीते कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में आईआईटी, आईआईएम, आईआईएमसी और एनआईटी जैसे शिक्षा संस्थान खुले हैं, जिससे युवाओं को अपने प्रदेश में बेहतर उच्च शिक्षा हासिल करने का एक मौका मिला है। प्रधानमंत्री विकास पैकैज पीएमएसएसएस और जेकेएसएसएस जैसी छात्रवृत्ति योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के युवा पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित देश के अन्य राज्यों में तकनीकी व नर्सिंग की पढ़ाई करने जा रहे हैं।