एनआईए मामलों की अदालत के स्पेशल जज ने एक यूएपीए आरोपी को श्रीनगर में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए जमानत से इन्कार कर दिया। आरोपी वहीद-उल-जहूर की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पेशल जज प्रेमसागर ने कहा कि मामला सुरक्षा का हो तो आरोपी को निजी आधार पर अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती।
आरोपी इस वक्त जिला जेल अंबफला में बंद है। उस पर एनआईए, यूएपीए, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज हैं। याचिकाकर्ता ने 14 और 15 अगस्त को बहन की शादी का हवाला देते हुए पारिवारिक रस्में निभाने के लिए अपनी मौजूदगी को सामाजिक, नैतिक और धार्मिक रूप से जरूरी बताया था।
आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि वह अपनी आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा और कोर्ट की लगाई हर शर्त का पालन करेगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने याचिका का विरोध किया। एजेंसी ने विशेष लोक अभियोजक जीएस चाड़क, लोक अभियोजक चंदन कुमार सिंह और अश्वनी वर्मा तथा मुख्य जांच अधिकारी डीएसपी सुधांशु राणा की ओर से दायर आपत्तियां पेश कीं।उन्होंने उन जेल रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें आरोपी के जेल के अंदर दुर्व्यवहार की बातें शामिल थीं। उस पर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब करने, कैदियों को सांप्रदायिक आधार पर भड़काने, गंदी भाषा का इस्तेमाल करने, जेल प्रशासन के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाें और जेल कर्मचारियों के साथ हाथापाई के आरोप हैं।
आरोपी का आचरण उसे अंतरिम जमानत की रियायत का हकदार नहीं बनाता
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जेल के अंदर आरोपी का पिछला आचरण उसे अंतरिम जमानत की रियायत का हकदार नहीं बनाता। टिप्पणी की कि शादी की रस्में या पारंपरिक दायित्व याचिकाकर्ता का छोटा भाई भी निभा सकता है। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की मौजूदगी अनिवार्य या बेहद जरूरी है। जेएनएफ