भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मोदी ने साफ कर दिया कि ऐसे मुद्दे पर किसी तरीके की सियासत उन्हें मंजूर नहीं है। इससे पहले मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी विधायकों से साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महबूबा को चुनौती दी थी कि अगर सीएम गंभीर हैं तो दो मंत्रियों को बर्खास्त क्यों नहीं करतीं, जिन्होंने रैली में शामिल होकर रसाना कांड मामले में आरोपियों के पक्ष में बयान दिए थे।
पीडीपी के सूत्र बताते हैं कि महबूबा पिछले 10 दिनों से गठबंधन के मुद्दे पुनर्विचार कर रही हैं। उन्होंने अपने करीबी रिश्तेदार पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरताज मदनी और मुजफ्फर हुसैन बेग से मशविरा किया। शोपियां और कुलगाम में मुठभेड़ के दौरान नागरिकों के मारे जाने के बाद उन्हें अपना जनाधार खिसकता नजर आने लगा।
विधायकों से बैठक में उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ने पर समर्थन हासिल कर लिया। इसके बाद महबूबा ने जब मोदी से फोन पर कहा कि लगता है कि मेरे वालिद मुफ्ती साहब का जम्मू और कश्मीर को जोड़ने का ख्वाब पूरा नहीं हो पाएगा। मुझे पार्टी में जवाब देने में मुश्किल हो रही है।
ऐसा ही चलता रहा तो मैं इस्तीफा दे दूंगी। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने कहा कि आप सिर्फ आधे घंटे इंतजार करें कठुआ मामले पर मंत्रियों के इस्तीफे हो जाएंगे।