जम्मू यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्कूल के सभागार में सोमवार को इमरजिंग चैलेंजेज इन न्यूक्लियर एंड मेनी बाडी फीजिक्स विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस आरंभ हो गया। इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश के सौ के करीब प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।
फीजिक्स एंड इलेक्ट्रानिक्स विभाग की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस का उद्घाटन जम्मू विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. आरडी शर्मा ने किया। इस मौके पर संयोजक प्रो. अरुण भारती उपस्थित रहे। इस मौके पर प्रो. आरडी शर्मा ने कहा कि न्यूक्लियर फीजिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान करना अपने आप में बहुत महत्व रखता है।
उन्होने न्यूक्लियर फीजिक्स के आधार पर शोध करनेवाले वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना की तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत तैयार करने की दिशा में हो रहे प्रयास को सराहा। वहीं, उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के कांफ्रेंस का मंच तैयार करने व अनुभवी वैज्ञानिकों के अनुभव सुनने से विश्वविद्यालय के शोध छात्रों के लिए काफी उपयोगी व ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगा। इससे उन्हें नए विचार पैदा करने में मदद मिलेगी।
इस कांफ्रेंस के कन्वीनर प्रो. अरुण भारती ने न्यूक्लियर फीजिक्स कम्युनिटी को लेकर अपने विचार रखे। वहीं, फीजिक्स डिपार्टमेंट के प्रो. विवेक गुप्ता ने न्यूक्लियर थ्योरी पर हुए शोध व उपलब्धियों पर विचार रखे।
इस दौरान आईआईटी रूढ़की के प्रो. एके जैन ने की-नोट प्रस्तुत किया। इस दौरान विभिन्न विज्ञान विषयों से जुड़े शोधछात्र मौजूद रहे। प्रो. एसके खोसा, प्रो. नरेश पादा, प्रो. अंजू भसीन, प्रो. बीसी शर्मा, प्रो. वीडी सिंह, प्रो. नीलू रोहमेत्रा भी उपस्थित रहे।
...तब से अधिक शोध होने लगे
एनआईटी जालंधर के प्रो. एचएम मित्तल ने न्यूक्लियर कांफ्रेंस के दौरान जानकारी दी कि जब से एटम बम तैयार हुआ तब से न्यूक्लियर पर अधिक शोध होने लगे। शोध कर्ताओं में जिज्ञासाएं बढ़ीं हैं। वहीं, न्यूक्लियर डाटा पर विश्लेषण करने की प्रक्रिया भी बढ़ी। उन्होंने कहा कि इस कांफ्रेंस के दौरान प्रो. एके जैन ने बताया कि न्यूक्लियर सौ साल पुराना विषय माना गया है। फिर भी यह विषय नवीन है।उन्होंने बताया कि सूर्य से जो ऊर्जा मिल रही है।