पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में उथल पुथल के बीच उससे लगते इलाके बारामुला संसदीय सीट पर जम्हूरियत का जश्न चरम पर है। बारामुला, कुपवाड़ा व बांदीपोरा जिले में बारामुला संसदीय सीट के लिए मतदान 20 मई को है। इस सीट में मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के दो विधानसक्षा क्षेत्रों में भी वोट डाले जाएंगे। यहां प्रचार के लिए अब दो दिन का समय शेष है। ऐसे में सभी दलों की ओर से जोर लगाया जा रहा है।
लोकसभा चुनाव में मतदान
खराब हालात के चलते 1991 में नहीं हुए थे चुनाव
आतंकवाद के चलते खराब हालात के चलते 1991 में लोकसभा के चुनाव कश्मीर की तीन सीटों पर नहीं हुए थे। पांच साल बाद 1996 में बारामुला, श्रीनगर व अनंतनाग सीट के लिए चुनाव हुए। पांच साल बाद चुनाव हुए तो बारामुला में 46.65 फीसदी मत पड़े।
सबसे कम 1989 में पड़े थे वोट
स्वतंत्रता के बाद बारामुला संसदीय सीट पर सबसे कम मतदान 1989 में हुआ। इस वर्ष यहां मात्र 5.89 वोट पड़े थे। हालांकि, अनंतनाग सीट पर 5.07 प्रतिशत वोट पड़े थे। श्रीनगर सीट पर निर्विरोध निर्वाचन हो गया था। तब यहां आतंकवाद का दौर शुरू हो गया था।
अलगाववादी का भाई भी आजमा रहा भाग्य
बारामुला से अलगाववादी नईम खान के भाई मुनीर खान भी चुनाव मैदान में है। मुख्यधारा में लौटने के लिए वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय समस्याओं, युवाओं की मुश्किलों को लेकर वह चुनाव लड़ रहे हैं। बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां का पर्यटन भी प्रभावित हो रहा है। यह सारे मुद्दे हैं जिन्हें हल किए जाने के लिए चुनाव मैदान में हैं।
2019 के बाद हुए पहले चुनाव में श्रीनगर सीट पर मतदान का 28 साल का रिकॉर्ड टूट गया था। उम्मीद है कि बारामुला में भी पिछले चुनाव से अधिक वोटिंग होगी। मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। जागरूकता एक्सप्रेस भी चलाई गई है। सभी मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधाओं का ख्याल रखा गया है।