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Jammu : पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर में उथल-पुथल, पाकिस्तान सीमा से सटे बारामुला में जम्हूरियत का जश्न चरम पर

Fri, 17 May 2024 05:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

बारामुला, कुपवाड़ा व बांदीपोरा जिले में बारामुला संसदीय सीट के लिए मतदान 20 मई को है। इस सीट में मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के दो विधानसक्षा क्षेत्रों में भी वोट डाले जाएंगे। यहां प्रचार के लिए अब दो दिन का समय शेष है। ऐसे में सभी दलों की ओर से जोर लगाया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में उथल पुथल के बीच उससे लगते इलाके बारामुला संसदीय सीट पर जम्हूरियत का जश्न चरम पर है। बारामुला, कुपवाड़ा व बांदीपोरा जिले में बारामुला संसदीय सीट के लिए मतदान 20 मई को है। इस सीट में मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के दो विधानसक्षा क्षेत्रों में भी वोट डाले जाएंगे। यहां प्रचार के लिए अब दो दिन का समय शेष है। ऐसे में सभी दलों की ओर से जोर लगाया जा रहा है।

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कश्मीर की सभी तीन सीटों में से इस सीट पर हर बार वोटिंग अधिक होती रही है। इस वीआईपी सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जेल में बंद इंजीनियर रशीद, पीपुल्स कांफ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन तथा 370 हटने के खिलाफ संसद में कुर्ता फाड़ने वाले राज्यसभा सदस्य रहे पीडीपी प्रत्याशी फैय्याज मीर के बीच मुकाबला है।

परिसीमन में इस संसदीय सीट का भी नक्शा बदल गया है। इसमें बडगाम जिले की दो सीटें जोड़ दी गई है। अब यह सीट चार जिलों की 18 विधानसभा सीट को मिलाकर बनाया गया है। बडगाम की बडगाम व बीरवाह विधानसभा क्षेत्र को बारामुला से जोड़ा गया है। इसके साथ ही बारामुला, बांदीपोरा व कुपवाड़ा जिले पाकिस्तान से लगते हैं। सभी जिलों में मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि 2019 के बाद हो रहे पहले चुनाव में समीकरण बदले हैं। 
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उमर अब्दुल्ला परिवार की परंपरागत सीट बदलकर बारामुला से चुनाव मैदान में हैं। यहां विरोधी उन्हें बाहरी उम्मीदवार भी ठहराने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उमर और फैय्याज मीर को पार्टी के कैडर का भरोसा है तो इंजीनियर रशीद को पिछली बार के प्रदर्शन और जेल से रहकर चुनाव लड़ने में लोगों के भावनात्मक जुड़ाव की उम्मीद है। ताजा घटनाक्रम में आजाद की पार्टी डीपीएपी की ओर से समर्थन दिए जाने से भी स्थितियां बदलने की इंजीनियर रशीद की अवामी इतिहाद पार्टी को उम्मीद है। पीपुल्स कांफ्रेंस पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर थी। उसे अपने कैडर के साथ ही अपनी पार्टी का साथ मिल रहा है। इसके साथ ही बडगाम से भी डीडीसी नजीर खान की ओर से समर्थन दिए जाने की घोषणा से बेहतर परिणाम की उम्मीद है।

जिलावार मतदान की स्थिति

  • जिला 2004 2009 2014 2019
  • कुपवाड़ा 40.08 53.94 62.54 51.7
  • बारामुला 30.60 32.47 24.71 24.0
  • बांदीपोरा 40.46 45.40 35.24 31.8
  • बडगाम 36.88 40.77 40.08 21.5

लोकसभा चुनाव में मतदान

  • 1989 5.48
  • 1996 46.65
  • 1998 41.94
  • 1999 27.79
  • 2004 35.65
  • 2009 41.84
  • 2014 39.14
  • 2019 34.71

खराब हालात के चलते 1991 में नहीं हुए थे चुनाव
आतंकवाद के चलते खराब हालात के चलते 1991 में लोकसभा के चुनाव कश्मीर की तीन सीटों पर नहीं हुए थे। पांच साल बाद 1996 में बारामुला, श्रीनगर व अनंतनाग सीट के लिए चुनाव हुए। पांच साल बाद चुनाव हुए तो बारामुला में 46.65 फीसदी मत पड़े।

सबसे कम 1989 में पड़े थे वोट
स्वतंत्रता के बाद बारामुला संसदीय सीट पर सबसे कम मतदान 1989 में हुआ। इस वर्ष यहां मात्र 5.89 वोट पड़े थे। हालांकि, अनंतनाग सीट पर 5.07 प्रतिशत वोट पड़े थे। श्रीनगर सीट पर निर्विरोध निर्वाचन हो गया था। तब यहां आतंकवाद का दौर शुरू हो गया था।

अलगाववादी का भाई भी आजमा रहा भाग्य
बारामुला से अलगाववादी नईम खान के भाई मुनीर खान भी चुनाव मैदान में है। मुख्यधारा में लौटने के लिए वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय समस्याओं, युवाओं की मुश्किलों को लेकर वह चुनाव लड़ रहे हैं। बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां का पर्यटन भी प्रभावित हो रहा है। यह सारे मुद्दे हैं जिन्हें हल किए जाने के लिए चुनाव मैदान में हैं।

2019 के बाद हुए पहले चुनाव में श्रीनगर सीट पर मतदान का 28 साल का रिकॉर्ड टूट गया था। उम्मीद है कि बारामुला में भी पिछले चुनाव से अधिक वोटिंग होगी। मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। जागरूकता एक्सप्रेस भी चलाई गई है। सभी मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। 

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- पीके पोले, मुख्य निर्वाचन अधिकारी

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