जम्मू कश्मीर के तंगधार में एक जवान की मां के शव को अंतिम संस्कार के लिए पांच दिन का इंतजार करना पड़ा.लगभग 8 लोगों की एक टीम ने जवान की मां के शव को लेकर बर्फ के बीच 70 किलोमीटर पैदल तय किए, लेकिन प्रशासन की ओर से इनकी कोई मदद नहीं की गई।
हालांकि सेना की उत्तरी कमान की ओर से इस पूरे मामले पर पक्ष रखते हुए कहा गया है कि जवान की मां के शव को पहुंचाने के लिए मौसम और बर्फ के हालातों का ध्यान रखते हुए शव को ले जाने के लिए सेना की यूनिट्स की ओर से सभी प्रकार की संभव सहायता उपलब्ध कराई गई थी।
इससे पूर्व मिली जानकारी के मुताबिक करनाह इलाके के रहने वाले एक जवान की मां सकीना बेगम को दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण 29 जनवरी को पठानकोट के आर्मी हॉस्पिटल में उनका देहांत हो गया।
हेलीकॉप्टर से ही घर तक ले जाया जा सकता था शव
कश्मीर में मानवता हुई शर्मसार
- फोटो : अमर उजाला
सकीना बेगम करनाह में अपने परिवार के साथ रहा करती थी और पिछले कुछ दिनों से अपने बेटे के साथ रह रही थीं। सकीना की मौत के बाद जब जवान ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई तो अफसरों ने हर संभव मदद का भरोसा दिया। लेकिन ऐसा हो न सका।
दरअसल करनाह जाने का रास्ता श्रीनगर से हेलीकॉप्टर के जरिए ही तय हो सकता था क्योंकि पूरे रास्ते पर करीब 1 फीट तक बर्फ पड़ी हुई थी। ऐसे में श्रीनगर के बाद करनाह जाने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा था पर वह मिल न सका।
70 किमी के बर्फीले रास्ते पर शव लेकर चले 8 लोग
कश्मीर में मानवता हुई शर्मसार
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जवान ने अपनी पत्नी की मदद से शव को उठाया और वहां से चौकीबल लेकर पहुंचा जहां उसने 4 दिन गुजारे। चौकी बल में जवान ने प्रशासन से संपर्क साधने की बहुतेरी कोशिश की लेकिन जब कोई मदद न मिली तो स्थानीय लोगों की मदद से रास्ते को पैदल तय करने का मजबूरी भरा निर्णय लेना पड़ा।
8 लोगों की मदद से जवान ने बर्फ की 1 फीट मोटी परत वाला रास्ता पैदल तय किया। इस तरह करीब 70 किमी की दूरी को तय करते हुए जवान अपने गृह जनपद पहुंच सका। जवान के साथ चल रहे लोगों ने इस दौरान एक वीडियो भी बनाया जिसमें हालातों की जानकारी देते हुए लोग प्रशासन से मदद की गुहार लगाते दिख रहे हैं।