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तीन तलाक बिल हुआ पास तो उमर अब्दुल्ला ने साधा महबूबा पर निशाना, जानिए कैसे पीडीपी ने खेला दांव

Wed, 31 Jul 2019 01:24 AM IST
Pranjal Dixit अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
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उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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देश में तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पेश बिल मंगलवार को राज्यसभा में विपक्ष का संख्या बल ज्यादा होने के बावजूद आसानी से पारित हो गया। इस दौरान भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों के भी संकेत दिखाई दिए। बिल पेश होने के बाद सदन में अनुपस्थित और वाकआउट करने वाले सांसदों की एक लंबी सूची थी। इनमें सबसे चौंकाने वाले दो नाम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सांसदों के भी थे। यह तब है जब जून 2018 में राज्य में भाजपा गठबंधन से अलग होने के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती हमेशा भाजपा पर गरजती रहीं। 
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीपी के सांसदों द्वारा सदन में गैर हाजिर रहना राज्य में भविष्य में भाजपा के साथ पुन: गठबंधन की संभावनाओं को फिर से जीवित करने की दिशा में पहला व मजबूत कदम है। बता दें कि महबूबा मुफ़्ती पहले से ही तीन तलाक बिल का विरोध कर रही थीं। उन्होंने कई बार दावा किया कि  भाजपा इस कानून के माध्यम से हमारे घरों में प्रवेश कर रही है। राज्य में भाजपा विरोधी नीति अपनाने वाली महबूबा मुफ्ती आज के इस दांव से सवालों के घेरे में फंस गई हैं। स्थानीय लोग पीडीपी सांसदों के इस कदम से भौंचक हैं। गौरतलब है कि उच्च सदन में मंगलवार को हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 जबकि खिलाफ 84 वोट पड़े। 


उमर ने खोला मोर्चा...

नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी महबूबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे पर दोनों के बीच ट्विटर वार शुरू हो गया है। 
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महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही अवैध घोषित किए जाने के बाद से विशेष रूप से ट्रिपल तालक बिल को पारित करने की आवश्यकता को समझने में विफल हूं। यह मुसलमानों को दंड देने के लिए अनुचित हस्तक्षेप प्रतीत होता है। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को देखते हुए  क्या यह वास्तव में प्राथमिकता होना चाहिए था।
 

उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट के जवाब में लिखा, महबूबा मुफ्ती जी, आप ट्वीट करने से पहले यह देखें कि आपके सदस्यों ने बिल पर कैसे वोट किया। मैं समझता हूं कि उन्होंने सरकार को बिल पास करने के लिए जरूरी नंबरों में मदद की। आप सरकार की सहायता नहीं कर सकते हैं और फिर पास होने की आवश्यकता को समझने में विफल रहते हैं।

इसके जवाब में महबूबा ने ट्वीट में लिखा, उमर साहब मेरा सुझाव है कि आप अपनी नैतिकता के ऊंचे घोड़ों से नीचे उतरें क्योंकि यह आपकी अपनी पार्टी थी जिसने जिसने 1999 में भाजपा के खिलाफ  वोट देने के लिए सोज साहब को निष्कासित कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि संसद से गैर हाजिर रहना अनिवार्य रूप से नो वोट है। 
 

उमर ने ट्वीट के जवाब में लिखा, मैडम बीस साल पहले की एक घटना को याद कर रही हैं, आप पीडीपी को बचाने के लिए सबसे अच्छा कदम है इसलिए आप स्वीकार कर रही हैं कि आपने अपने सांसदों को गैर हाजिर रहने का निर्देश दिया। गैर हाजिर रहना नो वोट नहीं है, एक नो वोट ही वोट होता है। गैर हाजिर रह कर इस बार आपने भाजपा की मदद की। 
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