उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह
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संस्कृत के संरक्षण और प्रचार के लिए आवश्यक प्रयास चल रहे हैं, क्योंकि यह भारतीय सभ्यता पर आधारित है। यह बात उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने वीरवार को कोट भलवाल में राष्ट्रीय संस्कृति संस्थान के वार्षिक दिवस समारोह में कही। समारोह में संस्कृत स्कालर प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, संस्थान के प्रिंसिपल प्रो. बाचा भारती, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हेंगेक सिंह, डा. चंद्र मौली रैना आदि मौजूद थे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत हमारे इतिहास का आधार है और हम सभी को सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह विशेष रूप से युवा पीढ़ी, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के बीच प्रचारित हो। उन्होंने कहा कि संस्कृत के ऐतिहासिक संदर्भ और युग को ध्यान में रखते हुए भाषा में लिखे गए प्राचीन ग्रंथों को समझने और उचित तरीके से अनुवाद करने की आवश्यकता है।
छात्रों और शिक्षकों की मांगों के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि पाठ्यक्रम की मान्यता के संबंध में उनकी सभी चिंताओं को संबंधित विभाग के साथ रखा जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने शिक्षा और खेल गतिविधियों में उत्कृष्टता हासिल करने वाले छात्रों को पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने कालेज की पत्रिका भी जारी की।