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रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए असम की तर्ज पर बनेगा ट्रिब्यूनल

Thu, 23 Mar 2017 12:15 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर् - फोटो : PTI
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रोहिंग्या मुस्लिमों के कारण जम्मू-कश्मीर की बिगड़ रही डेमोग्राफी पर केंद्र सरकार गंभीर है। रियासत से रोहिंग्या मुस्लिमों की वापसी और इस समुदाय के कारण हो रही अन्य समस्याओं के निपटारे के लिए असम की तर्ज पर ट्रिब्यूनल बनाने का फैसला लिया गया है।
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असम में बांगलादेशी मुस्लिमों की वापसी के जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 100 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। केंद्र सरकार रोहिंग्या मुद्दे पर भी ऐसे ट्रिब्यूनल बनाना चाहती है। लिहाजा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रोहिंग्या समुदाय के बारे में रियासत से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। 

जम्मू और आसपास के इलाकों में रोहिंग्या मुस्लिमों को सुनियोजित रूप से बसाने का मामला तूल पकड़ चुका है। रोहिंग्याओं को जम्मू से बाहर निकालने के लिए संघ परिवार के संगठनों के अलावा अन्य सामाजिक संगठन भी आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र ने विदेशी विषयक अधिनियम के तहत अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का पता लगाने और उन्हें उनके देश वापस भेजने संबंधी शक्तियां राज्यों को सौंपी हैं। लिहाजा रोहिंग्या मामले में ट्रिब्यूनल पर रियासत सरकार से भी जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। 
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डा. जितेन्द्र सिंह ने दिया जांच पर जोर

डा. जितेन्द्र सिंह - फोटो : file photo
जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या समुदाय को बसाने के मुद्दे पर भाजपा नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की सरकार को जिम्मेदार ठहराती है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने नेकां और कांग्रेस को सीधे पर आड़े हाथों लेते हुए जांच पर जोर दिया है। रोहिंग्या मुस्लिमों के मुद्दे पर अलगाववादियों का भी रूख नरम रहा है।

भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा का कहना है कि अनुच्छेद 370 और स्टेट सब्जेक्ट का हवाला देकर अलगाववादी कश्मीरी पंडितों के लिए सेटेलाइट कालोनी और सैनिक कालोनी से कश्मीर की डेमोग्राफी को खतरे की बात करते हैं लेकिन रोहिंग्या मुद्दे पर उनकी चुप्पी संदेहास्पद है।

जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या की मौजूदगी को आतंकवाद के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील माना गया है। रियासत सरकार के दस्तावेजों के अनुसार जम्मू के बाहरी इलाकों में 5743 रोहिंग्या और म्यांमार निवासियों के अलावा 322 विदेशी लोग रह रहे हैं। जम्मू के अलावा सांबा में भी रोहिंग्या लोगों ने स्थायी आवास बना लिया है। 

जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या समुदाय को दिल्ली और श्रीनगर के एनजीओ से मदद मिल रही है। ये एनजीओ रोहिंग्या को फंडिंग करते हैं। रियासत सरकार के सूत्रों के मुताबिक अब तक 38 रोहिंग्या के खिलाफ 17 मुकदमे दर्ज हुए हैं जिनमें अन्य मामलों के अलावा अवैध रूप से सीमा पार कर जम्मू कस्मीर में प्रवेश का मामला भी शामिल है। कुछ मदरसे भी रोहिंग्या से जुड़े हुए हैं। 
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