जम्मू कश्मीर में ट्रांसपोर्ट स्ट्राइक
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ट्रांसपोर्ट से जुड़े सभी शुल्क बढ़ाने के विरोध में तीन दिन तक जम्मू कश्मीर में चक्का जाम रहेगा। कोई भी यात्री और माल ढुलाई का निजी वाहन सड़कों पर नहीं उतरेगा। यही नहीं, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहन भी नहीं आएंगे।
ट्रांसपोर्टरों को पड़ोसी राज्यों ने भी समर्थन दिया है। ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सभी संस्थाओं ने वीरवार को संयुक्त रूप से एक पत्रकार वार्ता में इसकी घोषणा की है। राज्य ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन त्रिलोचन सिंह वजीर ने कहा कि फिलहाल सोमवार से तीन दिन के लिए चक्का जाम किया जाएगा।
यदि फिर भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो यह हड़ताल तीन दिन बाद अनिश्चितकालीन के लिए हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम हर रोज बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही राज्य सरकार ट्रांसपोर्टरों के टैक्स भी बढ़ाती जा रही है। 100 फीसदी शुल्क और पेनल्टी बढ़ा दी गई है।
सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री महबूबा
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उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री और परिवहन मंत्री से कई बार मिलकर कहा गया कि शुल्कों में वृद्धि को लेकर कटौती करें, लेकिन, कोई रिस्पांस न आने के चलते हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं।
ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांगों में पैसेंजर वेलफेयर फंड वापस लेने, वाहनों पर स्पीड गवर्नर को वापस लेने, यात्री टैक्स को माफ करने, 25 साल पुराने वाहनों पर विशेष इन्सेटिव, यात्री किराए में बढ़ोतरी करना, 100 फीसदी पेनल्टी और शुल्क को वापस लेने की मांग शामिल है।
सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि इस बीच ट्रांसपोर्टरों से बात कर उनकी मांगों को हल किया गया तो हड़ताल वापस होगी, नहीं तो हड़ताल चलेगी।
हड़ताल में ये रहेंगे शामिल
हड़ताल में रहेंगे शामिल
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45 हजार आटो रिक्शा, 6 हजार बसें, 8 हजार मिनी बसें, 4 हजार टूरिस्ट वाहन, 10 हजार लोड कैरियर और बाकी के अन्य वाहन शामिल हैं। आटो यूनियन, बस यूनियन, ऑयल टैंकर यूनियन, ट्रक यूनियन, मिनी बस यूनियन, टूरिस्ट टैक्सी यूनियन सभी समर्थन में हैं।