राज्यसभा चुनाव में भाजपा और पीडीपी के तालमेल के बाद पारदर्शी गठबंधन सरकार का एजेंडा तय हो गया है। राज्यसभा चुनाव में आपसी समझदारी बढ़ने के बाद अब पीडीपी और पीपुल्स कांफ्रेंस का बाकायदा एनडीए में शामिल होना तय है।
हालांकि, राज्यसभा चुनाव में भाजपा को एक सीट पर पराजय का मुंह देखना पड़ा, लेकिन, चुनाव में पीडीपी से आपसी समझदारी विकसित हुई। केंद्र में भाजपा की सरकार अपनी इमेज के प्रति ज्यादा सचेत थी, लिहाजा, राज्यसभा चुनाव में विधायकों को पटाने के दूसरे तरीके आजमाए नहीं गए।
दूसरी ओर कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद का सियासी करिअर दांव पर था। नतीजतन उन्होंने निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। आजाद जीत दर्ज करने में कामयाब रहे लेकिन एक सीट गंवाकर भी भाजपा और पीडीपी में निकटता बढ़ी।
भावी गठबंधन सरकार के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का ड्राफ्ट पहले ही तैयार हो चुका है। अब विधिवत वार्ता जल्द शुरू करने की कवायद तेज है।
मुद्दों पर आधारित होगी रियासत की मिलीजुली सरकार
पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद और भाजपा आलाकमान के बीच अब सरकार में हिस्सेदारी को अंतिम रूप दिया जाना है। औपचारिक वार्ता में सीएमपी पर भी आधिकारिक बातचीत होगी। रोटेशनल सीएम का मामला भी इस दौर में तय किया जाना है।
गठबंधन में अधिक हिस्सा लेने की रणनीति के तहत दोनों दल जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते। पीडीपी संरक्षक मुफ्ती ने साफ कर दिया है कि वह कश्मीर में शांति और पाकिस्तान से मित्रता के माहौल के एजेंडे पर कायम हैं। इसलिए भाजपा के एक फोन पर दिल्ली जाने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
आधिकारिक वार्ता जम्मू या श्रीनगर में हो सकती है। भाजपा की ओर से दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना है। भाजपा ने रोटेशनल सीएम पर कोई समझौता नहीं करने की मंशा पहले ही जाहिर कर दी है।
इस फार्मूले के तहत पहले तीन साल के लिए पीडीपी के मुफ्ती मुख्यमंत्री का ओहदा संभाल सकते हैं और भाजपा को डिप्टी सीएम का पद मिल सकता है। विधानसभा का अध्यक्ष भाजपा का होगा।
एनडीए में शामिल होगी पीडीपी और पीपुल्स कांफ्रेंस
पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव में ईमानदारी से भाजपा का साथ दिया। पीडीपी के सारे विधायक भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में एकजुट थे। भाजपा ने भी ऐसी ही भूमिका निभाई। दोनों दलों में साथ मिलकर काम करने का यह पहला मौका था।
इस प्रयोग के बाद पीडीपी को एनडीए में शामिल करने की भी कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत केंद्र में पीडीपी को मंत्रिमंडल में एक सीट मिल सकती है। पीडीपी की ओर से महबूबा मुफ्ती का नाम इसके लिए लगभग तय है।
पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन ने विधानसभा चुनाव से ही भाजपा का खुला समर्थन किया है। राज्यसभा चुनाव में भी पीपुल्स कांफ्रेंस के दोनों वोट भाजपा को ही मिले। इस पृष्ठभूमि ने पीपुल्स कांफ्रेंस को भी एनडीए शामिल करने की योजना है।
भाजपा की ओर से हीना भट को भी मंत्री पद दिया जा सकता है। वह विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। अब उन्हें विधान परिषद में लाने की तैयारी चल रही है। रियासत की भावी सरकार में लोन का भी मंत्री पद से नवाजा जाना लगभग तय है।