प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर यातायात विभाग के रूट डायवर्जन के मकड़जाल में लोग दिनभर उलझे रहे। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट से आने वाले यात्रियों से लेकर स्कूल, कालेज और कार्यालयों तक पहुंचने के लिए सरकारी कर्मचारियों को लिफ्ट का सहारा लेना पड़ा।
सुबह 10 बजे शुरू हुई यह परेशानी शाम तक जस की तस रही। रैली के खत्म होने के बाद यातायात व्यवस्था धराशायी हो गई और यात्री वाहनों में घुसने के लिए लोगों में मारामारी मच गई। देर शाम तक शहर में जाम की समस्या से पुलिस और यातायात पुलिस
शहर के अति व्यस्त बिक्रम चौक को चारों ओर से सील कर दिया गया।
ज्यूल चौक, जम्मू विश्वविद्यालय रोड, सतवारी रोड, वेयर हाउस आदि से बिक्रम चौक जाने वाली रोड सील कर दी गई। मेन स्टाप से लेकर ज्यूल चौक के हाईवे को जोड़ने वाले छोटे-छोटे रास्तों को भी सील कर दिया गया।
इनमें वेयर हाउस, ग्रीन बेल्ट पार्क, पुलिस लाइन, मेन स्टाप, समाधियां रोड, विश्वविद्यालय रोड, बीसी रोड, कनाल रोड से निकलने वाले रोड शामिल हैं।
धराशायी हो गई यातायात व्यवस्था
जब तक मोदी की रैली खत्म नहीं हुई, तब तक यातायात व्यवस्था पर यातायात पुलिस और सुरक्षा बलों का शिकंजा था। जैसे ही रैली खत्म हुई तो सुरक्षाकर्मी भी नदारद हो गए और यहां कहीं सुरक्षाकर्मी थे, वो भीड़ के आगे बेबस नजर आए। रैली होने के बाद पूरे शहर में जाम की स्थिति बन गई। दिनभर रूट डाईवर्जन की मार झेलने के बाद देर शाम तक लोगों पर जाम की मार रही।
पुंछ रूट से आने वाले वाहनों को मुट्ठी, श्रीनगर रूट से आने वाले वाहनों को नगरोटा, कठुआ रूट से आने वाले वाहनों को कुंजवानी बाईपास, आरएस पुरा से आने वाले वाहनों को गाडीगढ़ ही रोक देने से हजारों यात्री दरबदर हुए। इनमें अधिकतर लोग निजी कंपनियों और सरकारी कार्यालयों में जाने वाले थे। जो दो पहिया वाहन चालकों से लिफ्ट मांग-मांग कर कार्यालय पहुंचे। बिक्रम चौक आने वाले लोगों को पैदल चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
रेलवे स्टेशन, इंटर स्टेट बसों और हवाई सेवा से राज्य पहुंचने वाले बाहरी राज्यों के यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इनमें खासकर वैष्णो देवी के श्रद्धालु शामिल थे। रेलवे स्टेशन से आने वाले यात्रियों को कटड़ा पहुंचने के नगरोटा बाईपास का सहारा लेना पड़ा। एयरपोर्ट आने वाले यात्री भी पनामा चौक से होकर बस स्टैंड और अन्य रास्तों से अपने गंतव्य तक पहुंचे।