जम्मू में रोड एक्सीडेंट और नशाखोरी के मामले जिला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। दोनों मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। थानों में दर्ज होने वाले मामलों में एक चौथाई मामले रोड एक्सीडेंट के हैं जबकि 300 से अधिक लोग एनडीपीएस के मामलों में पकड़े गए हैं।
जम्मू जिले में वर्ष 2018 में 30 नवंबर तक कुल 3928 केस दर्ज हुए। इनमें से 1130 मामले सिर्फ रोड एक्सीडेंट के ही हैं। 1009 लोग इन एक्सीडेंट में घायल हो गए और 121 लोगों की जान चली गई। वहीं एनडीपीएस के 245 मामले दर्ज हुए हैं। चरस के मामलों में 24, हेरोइन की तस्करी में 175, ओपियम मामले में एक, भुक्की के मामले में 66, नशीले कैप्सूल के मामले में 20, गांजा के मामले में 32 और कोरेक्स बेचने के मामले में 4 लोग पकड़े गए।
तेजी से बढ़ रहा नशा
जम्मू जिले में इस समय 400 से अधिक युवा नशे के जाल में फंसे हैं। इनका साइकेट्री हॉस्पिटल में बने नशा मुक्ति केंद्र में उपचार चल रहा है। हर साल 200 से अधिक युवक इस नशे के दलदल में फंस रहे हैं। यहां तक कि महिलाओं को भी इसकी लत लग रही है।
रोड एक्सीडेंट कंट्रोल करने को एक साथ
जम्मू, आरटीओ, दीप राज कनेथिया ने बताया कि शहर में बढ़ते सड़क हादसों पर नियंत्रण पाने के लिए अब सभी विभाग मिलकर काम करेंगे। परिवहन विभाग के आयुक्त कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
जहां पर लोक निर्माण विभाग, ट्रैफिक पुलिस, जनरल पुलिस, आरएंडबी, स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग सहित अन्य विभागों की तकनीकी टीम काम करेगी। जब भी कहीं पर एक्सीडेंट होगा, तो उसी समय एक्सीडेंट की जानकारी कंट्रोल रूम में जाएगी।
कंट्रोल रूम से न सिर्फ एक्सीडेंट से प्रभावित लोगों की मदद होगी, बल्कि इस पर मंथन भी होगा कि यह एक्सीडेंट क्यों हुआ, कहां हुआ, कैसे हुआ और ऐसे एक्सीडेंट भविष्य में न हों, इसके लिए क्या किया जाए।