कट्टरपंथी अलगाववादी नेता और हुर्रियत (ग) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी, हुर्रियत (म) के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक एक साथ सोमवार को नारबल पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस फायरिंग में मारे गए सुहैल अहमद सोफी के परिवार वालों के प्रति सहानुभूति प्रकट की।
परिवार वालों के साथ कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने लोगों के समूह को संबोधित किया। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस दौरान गिलानी ने कहा कि अलगाववादियों के दल अलग-अलग हैं, लेकिन उनका जो उद्देश्य है, उनकी जो मुहिम है, उसके लिए सभी इकट्ठे हुए हैं।
यहां की जनता बिखरी हुई है, क्योंकि कभी आप लोग उनकी मुहिम का साथ देते हो और कभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर अपने मत का इस्तेमाल कर राजनेता चुनते हो।
'जनता तय करे किसका साथ देना है'
गिलानी ने लोगों से कहा कि पहले जनता सुनिश्चित कर ले कि वह किनका साथ देना चाहती है। उन्होंने कहा कि अनेकता में ही एकता है। इसलिए हम सबको एकजुट होने की आवश्यकता है।
गिलानी ने लोगों से एकजुट होकर उनकी मुहिम का साथ देने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब वह कामयाब होंगे।
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि भाजपा समेत घाटी की अन्य राजनीतिक दलों का एक ही उद्देश्य है, वह है हम कश्मीरियों की मुहिम को कमजोर करना।
लेकिन कश्मीर के लोगों का जोश और जज्बा खासकर युवाओं का उन्हें उनके इस मंसूबे में सफल होने नहीं देगा।
यासीन ने भी बोले कड़वे बोल
जेकेएलएफ अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मालिक ने कहा कि बार-बार कश्मीरी युवाओं को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक ऐसा ही चलता रहेगा।
त्राल और नारबल में हुई हत्याओं की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से सभी को दुख पहुंचता है। इस दौरान लोगों द्वारा आजादी के हक में नारे भी लगाए गए और इन नेताओं की मुहिम में सहयोग का आश्वासन दिया।
इनके अलावा रैली में अय्याज अकबर भट, हिलाल वार, शकील बख्शी समेत अन्य अलगाववादी नेता मौजूद थे।